मध्यप्रदेश में शिक्षकों की विभिन्न समस्याओं और लंबित मांगों के समाधान को लेकर शिक्षक संघर्ष समिति मध्यप्रदेश के बैनर तले राजधानी भोपाल के आम्बेडकर पार्क में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू हो गई है। आंदोलन की शुरुआत दो सेवानिवृत्त महिला शिक्षिकाओं सहित चार शिक्षकों ने की है। समिति ने स्पष्ट किया है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेती, यह आंदोलन अनवरत जारी रहेगा।
भूख हड़ताल पर रीता मल्होत्रा (पांढुर्णा), शोभा पाटीदार (रतलाम), भारत भार्गव (इंदौर) और परसराम कापड़िया (रतलाम) बैठे हैं। आंदोलनकारियों को मानसिक व आत्मीय संबल देने और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने के लिए 2 अक्टूबर से प्रतिदिन दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक धरना स्थल पर प्रभु श्रीराम कथा का आयोजन भी किया जा रहा है।
शिक्षक संघर्ष समिति की 3 प्रमुख मांगें
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सेवारत शिक्षकों को TET परीक्षा से मिले पूर्ण मुक्ति
वर्तमान में कार्यरत शिक्षकों की भर्ती तत्कालीन नियमों के तहत विधिवत हुई थी, ऐसे में वर्षों की सेवा के बाद दोबारा शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) लेना अनुचित है।राज्य सरकार तमिलनाडु और जम्मू-कश्मीर की तर्ज पर विधानसभा या कैबिनेट से प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजे और तब तक TET से जुड़ी किसी भी बाध्यकारी प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए।
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प्रथम नियुक्ति तिथि से हो सेवा अवधि की गणना (वरिष्ठता व लाभ)
नवीन शिक्षक संवर्ग में शामिल करते समय सेवा की गणना 1 जुलाई 2018 से की जा रही है, जिससे शिक्षकों को सेवाकालीन लाभ, क्रमोन्नति, एनपीएस (NPS) और ग्रेच्युटी में भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। हाईकोर्ट की जबलपुर, इंदौर और ग्वालियर खंडपीठ के फैसलों के अनुरूप सेवा अवधि की गणना प्रथम नियुक्ति दिनांक से की जाए।
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निजी मोबाइल और डेटा से ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता बंद हो
शिक्षक तकनीक के विरोधी नहीं हैं, लेकिन निजी मोबाइल फोन और निजी इंटरनेट डेटा का उपयोग कराने से व्यक्तिगत डेटा की गोपनीयता (प्राइवेसी) पर खतरा मंडराता है। इसके अलावा सर्वर व तकनीकी खामियों के चलते शिक्षकों का वेतन कटने और मानसिक प्रताड़ना का जोखिम रहता है। विभाग उपस्थिति के लिए बायोमेट्रिक टैबलेट या अन्य संस्थागत वैकल्पिक संसाधन उपलब्ध कराए।
समिति ने स्कूल शिक्षा विभाग और जनजातीय कार्य विभाग से आग्रह किया है कि शिक्षकों की जायज मांगों पर संवेदनशीलता दिखाते हुए तत्काल वार्ता की जाए। आंदोलनकारियों का कहना है कि वे लोकतांत्रिक और गांधीवादी तरीके से अपनी बात शासन तक पहुंचा रहे हैं, ताकि सेवानिवृत्त और कार्यरत शिक्षकों को उनका हक मिल सके।



