नई दिल्ली: केंद्रीय पर्यटन और संस्कृति मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर के दौरान भारत को विश्व स्तरीय पर्यटन गंतव्य बनाने के लिए सरकार द्वारा उठाए जा रहे व्यापक कदमों का विवरण साझा किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि चिकित्सा पर्यटन सहित विभिन्न पर्यटन उत्पादों का विकास और संवर्धन प्राथमिक रूप से राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों की जिम्मेदारी है, लेकिन केंद्र सरकार अपनी राष्ट्रीय रणनीतियों और रोडमैप के माध्यम से इस दिशा में सक्रिय सहयोग प्रदान कर रही है।

चिकित्सा और कल्याण पर्यटन के क्षेत्र में भारत की बढ़ती शक्ति का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि विदेशी पर्यटकों की सुविधा के लिए ई-चिकित्सा वीजा और ई-चिकित्सा सहायक वीजा जैसी सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। वाणिज्य मंत्रालय के सेवा निर्यात संवर्धन परिषद ने एक विशेष वेबसाइट भी विकसित की है जो विदेशी नागरिकों को मान्यता प्राप्त अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के बारे में सटीक जानकारी देती है। ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन के आंकड़ों के अनुसार, साल 2024 में लगभग 6.44 लाख विदेशी पर्यटक केवल चिकित्सा उद्देश्यों के लिए भारत आए, जो देश की मजबूत स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति वैश्विक विश्वास को दर्शाता है।

भारत को सम्मेलनों और प्रदर्शनियों के लिए एक आकर्षक केंद्र (MICE) के रूप में प्रदर्शित करने के लिए सरकार ने ‘इनक्रेडिबल इंडिया’ के तहत ‘मीट इन इंडिया’ नामक एक नया उप-ब्रांड शुरू किया है। इसके साथ ही एक व्यापक डिजिटल कैटलॉग भी तैयार किया गया है जिसमें 60 से अधिक उन शहरों की बुनियादी सुविधाओं का विवरण है जिन्होंने जी20 बैठकों को सफलतापूर्वक आयोजित किया था। मंत्रालय ने एक राष्ट्रीय रणनीति भी तैयार की है जिसके मुख्य स्तंभों में व्यापार करने में आसानी, कौशल विकास और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय शहरों की मार्केटिंग करना शामिल है।

तीर्थस्थलों के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए पर्यटन मंत्रालय ‘प्रसाद’ (PRASHAD) और ‘स्वदेश दर्शन’ जैसी योजनाओं के माध्यम से राज्यों को वित्तीय सहायता उपलब्ध करा रहा है। इन योजनाओं के तहत मंदिर गलियारों के विकास के साथ-साथ भीड़ प्रबंधन, सीसीटीवी सुरक्षा, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और वर्षा जल संचयन जैसी आधुनिक सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है ताकि तीर्थयात्रियों का अनुभव सुरक्षित और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध रहे। इन परियोजनाओं को स्थानीय निकायों और अन्य हितधारकों के साथ परामर्श करके क्रियान्वित किया जाता है ताकि स्थलों की मौलिकता बनी रहे।

पर्यटकों की सुरक्षा और सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने ‘निधि+’ (NIDHI+) नामक डिजिटल डेटाबेस बनाया है, जहाँ सेवा प्रदाताओं का पैन और ओटीपी आधारित सत्यापन किया जाता है। पर्यटकों के साथ होने वाले शोषण या अधिक शुल्क वसूली की शिकायतों के समाधान के लिए मंत्रालय सीपीग्राम्स पोर्टल का उपयोग करता है और गंभीर मामलों में सेवा प्रदाताओं की अनुमति रद्द करने की कार्रवाई भी की जाती है। वर्तमान में देश के 15 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने पर्यटकों की सुरक्षा के लिए समर्पित ‘पर्यटक पुलिस’ की तैनाती की है, जिससे जमीन स्तर पर सुरक्षा तंत्र और मजबूत हुआ है।

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