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नई दिल्ली: केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत भारतीय औषध संहिता आयोग (IPC) ने देश में दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और स्वास्थ्य सेवाओं के मानकों को विश्वस्तरीय बनाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। सोमवार को दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में IPC ने तीन प्रमुख संस्थानों—गोवा राज्य फार्मेसी परिषद (GSPC), भारतीय गुणवत्ता परिषद (QCI) और HITES के साथ महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए।
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इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री हर्ष मंगला ने कहा कि ये समझौते केवल प्रतीकात्मक नहीं हैं, बल्कि इनका उद्देश्य वास्तविक धरातल पर दवाओं की सुरक्षा प्रणाली को मजबूत करना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि रोगी की सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करने के लिए फार्मासिस्टों के बीच जागरूकता बढ़ाना और उनकी पेशेवर क्षमता का विकास करना बेहद जरूरी है।
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गोवा बनेगा औषधि सतर्कता का मॉडल
गोवा राज्य फार्मेसी परिषद (GSPC) के साथ हुए समझौते के तहत राज्य में ‘फार्माकोविजिलेंस’ यानी दवाओं के दुष्प्रभावों की निगरानी के लिए एक मजबूत ढांचा तैयार किया जाएगा। इसके माध्यम से गोवा के फार्मासिस्टों को आधुनिक प्रशिक्षण और सतत शिक्षा दी जाएगी दवाओं के तर्कसंगत उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा ताकि मरीजों को गलत दवाओं के प्रभाव से बचाया जा सके।राज्य के स्वास्थ्य केंद्रों में प्रतिकूल दवा प्रतिक्रिया (ADR) की रिपोर्टिंग के लिए नए निगरानी केंद्र स्थापित किए जाएंगे।
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गुणवत्ता और जागरूकता के लिए QCI के साथ हाथ मिलाया
भारतीय गुणवत्ता परिषद (QCI) के साथ मिलकर IPC देश भर में स्वास्थ्य सेवा की गुणवत्ता और सार्वजनिक जागरूकता पर काम करेगा। इस साझेदारी के तहत तकनीकी संसाधनों का साझा उपयोग किया जाएगा और औषधि सतर्कता (Drug Vigilance) पर विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। यह कदम राष्ट्रीय गुणवत्ता और सुरक्षा उद्देश्यों को प्राप्त करने में मील का पत्थर साबित होगा।
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सरकार का संकल्प: सुरक्षित दवा, सुरक्षित मरीज
संयुक्त सचिव श्री हर्ष मंगला ने स्पष्ट किया कि दवाओं और फार्मास्यूटिकल्स पर सर्वोच्च ध्यान देने की आवश्यकता है। सरकार निरंतर नीतिगत सुधारों और क्षमता निर्माण के जरिए स्वास्थ्य क्षेत्र को सुदृढ़ बनाने में जुटी है। IPC अब तक ऐसे कई समझौतों पर हस्ताक्षर कर चुका है, जो यह दर्शाता है कि भारत सरकार दवाओं की शुद्धता और रोगियों की सुरक्षा के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
इन पहलों से न केवल देश के भीतर दवाओं के मानकों में सुधार होगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारतीय दवाओं की विश्वसनीयता और बढ़ेगी।

