रायपुर:
सरकारी स्कूलों में पदस्थ शिक्षकों और कर्मचारियों के सेवा रिकॉर्ड में बरती जा रही लापरवाही पर लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने सख्त रुख अपनाया है। अब कागजों और विभागीय पोर्टलों पर दर्ज पुराने व भ्रामक डेटा की विसंगति बर्दाश्त नहीं की जाएगी। विभाग ने स्पष्ट फरमान जारी किया है कि किसी भी शिक्षक या कर्मचारी के तबादले, रिटायरमेंट, निलंबन, बहाली या मृत्यु की स्थिति में उसके डिजिटल रिकॉर्ड को अधिकतम 5 दिन के भीतर अपडेट करना होगा।
इतना ही नहीं, डेटा अपडेट करने के बाद संबंधित अधिकारियों को विभाग को बाकायदा ‘कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र’ (Work Completion Certificate) भी भेजना होगा, जिससे जिम्मेदारी तय की जा सके।
गलत डेटा से विभागीय योजनाओं और बजट पर संकट
शिक्षा विभाग के अनुसार, डिजिटल पोर्टलों पर दर्ज सेवा रिकॉर्ड केवल हाजिरी के लिए नहीं, बल्कि वेतन निर्धारण, पदोन्नति, स्थानांतरण और विभिन्न सरकारी योजनाओं के बजट आवंटन का मुख्य आधार है।कई मामलों में ट्रांसफर या रिटायरमेंट के महीनों बाद भी संबंधित शिक्षक का नाम पुरानी संस्था के रिकॉर्ड में दर्ज रहता है।इस फर्जी व पुराने डेटा के चलते न सिर्फ शिक्षकों के सत्यापन में गड़बड़ी होती है, बल्कि प्रशासनिक कामकाज और सरकारी योजनाओं का जमीनी क्रियान्वयन भी बुरी तरह प्रभावित होता है।
एक पोर्टल पर सुधार से काम नहीं चलेगा: 3 स्तरों पर होगा डेटा सिंक्रनाइज़ेशन
विभाग ने साफ कर दिया है कि किसी एक जगह संशोधन कर पल्ला झाड़ लेने की व्यवस्था अब खत्म हो चुकी है। पदस्थापना या कार्यस्थिति में बदलाव होते ही सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर रिकॉर्ड 100% एक जैसा रखना होगा:
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cg创新 / cgschool.in पोर्टल: मुख्य विभागीय और प्रशासनिक डेटाबेस को तुरंत संशोधित करना होगा।
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विद्या समीक्षा केंद्र (VSK) ऐप: लगातार अपडेट हो रहे इस ऐप से पुराना व निष्क्रिय डेटा पूरी तरह हटाया जा रहा है।
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बायोमीट्रिक अटेंडेंस सिस्टम: उपस्थिति और वेतन निर्धारण वाले ऐप पर भी नई संस्था और कार्यस्थिति की सटीक मैपिंग अनिवार्य होगी।
लापरवाही पर नपेंगे अधिकारी: 5 दिन की डेडलाइन और प्रमाण पत्र अनिवार्य
लोक शिक्षण संचालनालय के निर्देशानुसार, आदेश जारी होने के 5 दिनों के भीतर तीनों डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर बदलाव दर्ज होना चाहिए। इसके तुरंत बाद संबंधित संस्था प्रमुख या नोडल अधिकारी को विभाग को कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र सौंपना होगा।यदि 5 दिन की तय समय-सीमा के बाद भी किसी स्कूल में स्थानांतरित या सेवानिवृत्त कर्मचारी का नाम पुराने रिकॉर्ड में एक्टिव पाया गया, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ सीधी जवाबदेही तय कर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।



