रायपुर:
छत्तीसगढ़ के सरकारी आयोजनों, चौराहों और सांस्कृतिक मंचों की पहचान बन चुकी ‘छत्तीसगढ़ महतारी’ की तस्वीर अब कानूनी रूप से अपने मूल रचनाकार के नाम दर्ज हो गई है। हरे रंग की पारंपरिक साड़ी, हाथ में धान की बाली और हंसिया लिए आशीर्वाद देती माता का यह बहुचर्चित चित्र बनाने वाले चित्रकार ईश्वर साहू ‘बंधी’ को इस कृति का बौद्धिक संपदा अधिकार (Intellectual Property Rights / Copyright) मिल गया है।
अब इस प्रसिद्ध कलाकृति का उपयोग किसी भी मंच, सार्वजनिक आयोजन, प्रचार सामग्री या मूर्ति निर्माण के लिए करने से पहले कलाकार की अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
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15 दिनों की साधना से 2018 में गढ़ा गया था स्वरूप
चित्रकार ईश्वर साहू के अनुसार, उन्होंने छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, कृषि जीवन और मातृत्व को एक रूप देने के लिए वर्ष 2018 में इस तस्वीर का रेखांकन किया था। इसे पूरा करने में उन्हें करीब 15 दिन का समय लगा: पारंपरिक स्वरूप में महतारी को छत्तीसगढ़िया आभूषणों और हरी साड़ी में दर्शाया गया, जो राज्य की हरियाली और प्रकृति प्रेम का प्रतीक है। एक हाथ में धान की सुनहरी बाली और हंसिया प्रदेश के कृषक जीवन का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि दूसरा हाथ राज्यवासियों को सुख-समृद्धि धान का कटोरा और मेहनत का सम्मान का आशीर्वाद देता दिखता है।
सरकारी प्रतीक से लेकर चौराहों तक की यात्रा
18 जून 2022 को तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया पर इस तस्वीर को साझा करते हुए राज्य के सभी शासकीय कार्यक्रमों में छत्तीसगढ़ महतारी के इस चित्र को प्रमुखता से स्थान देने का आधिकारिक ऐलान किया था। इसके बाद से: प्रदेश के सभी सरकारी दफ्तरों, आयोजनों और मंचों पर इस तस्वीर को अनिवार्य किया गया। जिला मुख्यालयों और प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर इसी स्वरूप पर आधारित कांस्य व अन्य धातुओं की भव्य प्रतिमाएं स्थापित की गईं।
“मकसद पैसा नहीं, सम्मान और श्रेय पाना था”: ईश्वर साहू
तस्वीर की लोकप्रियता बढ़ने के साथ ही इसका व्यापक व्यावसायिक और सार्वजनिक उपयोग शुरू हो गया, लेकिन इसके मूल रचनाकार का नाम कहीं दर्ज नहीं था। साथियों और शुभचिंतकों की सलाह पर ईश्वर साहू ने फरवरी 2023 में कॉपीराइट के लिए आवेदन किया। पूरी जांच, सुनवाई और विधिक प्रक्रियाओं के बाद अब जाकर उन्हें 3 साल की कानूनी प्रक्रिया के बाद यह अधिकार प्राप्त हुआ है। ईश्वर साहू का कहना है कि यह लड़ाई आर्थिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि एक कलाकार के बौद्धिक अधिकार और स्वाभिमान की थी। वे कहते हैं, “नियमों के तहत जो रॉयल्टी तय होगी वह एक विषय है, लेकिन मेरे लिए सबसे बड़ा संतोष यह है कि अब कोई भी इस तस्वीर का उपयोग करेगा, तो रचनाकार के रूप में मेरा नाम और श्रेय सामने रहेगा।”


