शिवरीनारायण। छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन के “संगठन समीक्षा, संवाद एवं संकल्प प्रांतीय अधिवेशन” का आयोजन शिवरीनारायण स्थित पावन राम मिलेंगे आश्रम, तेंदुआधाम में हुआ। प्रदेशभर से पहुंचे 33 जिलों के जिला अध्यक्ष, सभी विकासखंडों के अध्यक्ष एवं प्रांतीय पदाधिकारियों की मौजूदगी में आयोजित दो दिवसीय अधिवेशन में संगठन की समीक्षा के साथ शिक्षकों के लंबित मुद्दों को लेकर तेज और निर्णायक संघर्ष की रणनीति पर मंथन किया गया।
अधिवेशन का शुभारंभ फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र राठौर के अध्यक्षीय संबोधन से हुआ। उन्होंने राम मिलेंगे आश्रम, तेंदुआधाम की पावन धरा पर प्रदेशभर से पहुंचे पदाधिकारियों का स्वागत करते हुए कहा कि फेडरेशन महज एक संगठन नहीं, बल्कि शिक्षकों का परिवार और उनके अधिकारों की सामूहिक आवाज है। संगठन के प्रत्येक पदाधिकारी को फेडरेशन का आधार स्तंभ बताते हुए उन्होंने कहा कि अब समय केवल चर्चा का नहीं, बल्कि अपने अधिकारों और किए गए वादों को पूरा कराने के लिए मजबूती से आवाज बुलंद करने का है।
“मोदी की गारंटी” के वादे पूरे कराना होगा—फेडरेशन लेगा संकल्प
प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र राठौर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “मोदी की गारंटी” के तहत किए गए वादों को पूरा कराने के लिए फेडरेशन पूरी मजबूती से अपनी मांग रखेगा। उन्होंने कहा कि शिक्षकों से किए गए वादे केवल चुनावी घोषणा बनकर न रह जाएं, इसके लिए संगठन शासन का ध्यान लगातार आकर्षित करेगा।
उन्होंने कहा कि इस अधिवेशन में “मोदी की गारंटी” में किए गए वादों को पूरा कराने का संकल्प लिया जाएगा और आगामी दिनों में इन्हीं मुद्दों को लेकर संगठन की दिशा और रणनीति तय की जाएगी।
राठौर ने कहा कि शिक्षक वर्षों से अपनी जायज मांगों को लेकर संघर्षरत हैं। सरकार से अपेक्षा है कि शिक्षकों की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाए। यदि समस्याओं का समाधान समयबद्ध तरीके से नहीं होता है तो संगठन अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत आवाज को और बुलंद करने के लिए बाध्य होगा।
TET पर असमंजस ने बढ़ाई नाराजगी, विभाग से स्पष्ट निर्णय की मांग
अधिवेशन में TET और विभागीय परीक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठा। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि एक वर्ष में तीन बार विभागीय TET परीक्षा आयोजित किए जाने की बात कही गई थी, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी परीक्षा को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है।
उन्होंने कहा कि लगातार बनी हुई अनिश्चितता से शिक्षकों में आक्रोश और असमंजस की स्थिति है। सरकार और विभाग को अब TET के मामले में स्पष्ट नीति और स्पष्ट समय-सारणी सामने रखनी चाहिए।
फेडरेशन ने TET की अनिवार्यता, विभागीय परीक्षा एवं इससे जुड़े शिक्षकों के हितों पर गंभीरता से चर्चा करते हुए आगामी रणनीति तैयार करने की बात कही।
अब केवल आश्वासन नहीं, चाहिए ठोस निर्णय
प्रदेश अध्यक्ष राठौर ने कहा कि शिक्षक समाज लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर शासन का ध्यान आकर्षित करता रहा है। आश्वासन और चर्चाओं से आगे बढ़कर अब ठोस निर्णय की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि संगठन शिक्षकों की समस्याओं को लेकर शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखता आया है और आगे भी रखेगा। लेकिन मांगों के समाधान में अनावश्यक विलंब होने की स्थिति में संगठन अपने पदाधिकारियों और शिक्षकों से संवाद कर आगे की रणनीति तय करेगा।
शिक्षक हित के साथ बच्चों के भविष्य की भी चिंता
फेडरेशन ने स्पष्ट किया कि उसका संघर्ष केवल शिक्षकों की सेवा संबंधी समस्याओं तक सीमित नहीं है। अधिवेशन में ग्रामीण क्षेत्रों में अध्ययनरत बच्चों के सर्वांगीण विकास, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तथा नई शिक्षा नीति में शिक्षक की भूमिका पर भी चर्चा की गई।
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में शिक्षक सीमित संसाधनों के बीच बच्चों के भविष्य को संवारने का कार्य कर रहे हैं। इसलिए शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए शिक्षक की समस्याओं का समाधान और उन्हें बेहतर कार्य वातावरण उपलब्ध कराना भी आवश्यक है।
राम मिलेंगे आश्रम से निकलेगा संगठन की नई दिशा का संकल्प
शिवरीनारायण की पावन धरा पर स्थित राम मिलेंगे आश्रम, तेंदुआधाम में आयोजित इस अधिवेशन को संगठन की आगामी दिशा तय करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना गया। दो दिनों तक चले मंथन में संगठन की जमीनी स्थिति, शिक्षकों की समस्याओं, “मोदी की गारंटी” के वादों, TET, विभागीय परीक्षा और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विषयों पर पदाधिकारियों ने खुलकर विचार रखे।
फेडरेशन ने स्पष्ट किया कि शिक्षकों के अधिकारों और सम्मान से जुड़े मुद्दों पर संगठन पीछे नहीं हटेगा। पदाधिकारियों ने एकजुटता के साथ संगठन को और मजबूत करने तथा आगामी संघर्षों के लिए तैयार रहने का संकल्प लिया।
प्रदेशभर से उमड़ा पदाधिकारियों का हुजूम
अधिवेशन में प्रदेश स्तर के प्रमुख पदाधिकारी राजू टंडन, देवेंद्र हरमुख, शेषनाथ पांडेय, बसंत कौशिक, कौशल अवस्थी, सुरजीत सिंह चौहान, अश्वनी कुर्रे, सिराज बक्श, आदित्य गौरव साहू, दिनेश नायक, पुरुषोत्तम झाड़ी, हैम कुमार साहू, तरुण वैष्णव, अशोक धुर्वे, छबि राम पटेल, राजा राम पटेल, प्रदीप पटेल, गोकुल प्रसाद जायसवाल, आलोक त्रिवेदी, इंद्रजीत शर्मा, टिकेश्वर बोय, दीनबंधु वैष्णव, श्रीमती उमा पांडे एवं श्रीमती बुधनी अजय सहित बड़ी संख्या में प्रांतीय पदाधिकारी उपस्थित रहे।
जिला स्तर पर दिनेश राठौर, सुरेश नेताम, संदीप पांडे, संकीर्तन नंद, सुधीर चौहान, निर्भय केवाची, धीरेन्द्र मांझी, देव राज खूंटे, मदन राठौर, महेश यालम, लखेश्वर वर्मा, मुरित श्रीवास, दौलत ध्रुव, सीपी डडसेना, राहुल, आशीष कुमार सिंह, अजय गुप्ता, कृष्णा वर्मा, हरीश कुमार, गोपाल एवं पोखन साहू सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
विभिन्न विकासखंडों से कृष्ण कुमार, संत कुमार साहू, अजय कुमार मधुकर, गणेश चौहान, लोकेश साहू, श्रीमती ममता प्रजापति, सरयूकांत बंजारे, कमलेश नायक, वीरेंद्र कुमार यादव, अजीत कुजूर, लोचन प्रसाद बांधे, मनोज कुमार भारद्वाज, महेंद्र कुमार पटेल, चरण राठौर, रोशन सहारे, राम स्वरूप साहू, राम सिंह नायक, मंडावी जोगा, धनसाय नाग, कन्हैया सोनवानी, तृपेश चापड़ी, कोदूराम देवांगन, बाबूलाल ध्रुव, जगदीश हितकर, छत्रपाल, मुकेश साहू, जयप्रकाश कश्यप एवं शैलेन्द्र मार्बल सहित बड़ी संख्या में विकासखंड पदाधिकारी शामिल हुए।
राम मिलेंगे आश्रम, तेंदुआधाम में आयोजित यह अधिवेशन केवल संगठन की समीक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शिक्षकों के अधिकार, “मोदी की गारंटी” के वादों को पूरा कराने, TET के मुद्दे पर स्पष्ट निर्णय और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए संगठन की अगली लड़ाई की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुआ।


