राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान स्मृति पुरस्कार 2026 के लिए आवेदन शुरू
जशपुर
परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स में जशपुर का दमदार प्रदर्शन, ‘प्रचेष्टा-1’ जिलों में हुआ शामिलकेंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (PGI 2.0) 2025-26 की हालिया रिपोर्ट ने छत्तीसगढ़ के शैक्षिक परिदृश्य को स्पष्ट किया है। इस रिपोर्ट में रायगढ़ जिला सीखने के परिणामों और प्रभावी कक्षा संचालन में पूरे प्रदेश में अव्वल रहा है, जिसे कुल 600 में से 329 अंक प्राप्त हुए हैं।
UDISE+ 2025-26: छत्तीसगढ़ की शिक्षा के लिए उम्मीद की रिपोर्ट, लेकिन असली परीक्षा अब 33 जिलों की शिक्षक बढ़े, ड्रॉपआउट घटा, ट्रांजिशन रेट सुधरा, डिजिटल सुविधाएं बढ़ीं… अब सवाल- क्या यह बदलाव जशपुर, सरगुजा और बस्तर के अंतिम गांव तक पहुंचा?
विशेष रूप से जशपुर जिले की बात करें तो, जशपुर ने इस मूल्यांकन में कुल 319 अंक हासिल किए हैं, जिसके परिणामस्वरूप इसे प्रदेश के उन 18 जिलों में शामिल किया गया है जो ‘प्रचेष्टा-1’ श्रेणी में आते हैं।
समग्र राज्य के प्रदर्शन पर नजर डालें तो छत्तीसगढ़ को ‘आकांक्षी-1’ श्रेणी में रखा गया है। हालांकि रायगढ़ शीर्ष स्थान पर है, लेकिन डिजिटल शिक्षा के मामले में यह जिला अभी भी कई अन्य जिलों से पीछे है। रिपोर्ट यह भी संकेत देती है कि पूरे प्रदेश में बुनियादी सुविधाओं, शिक्षक प्रशिक्षण और शिक्षा प्रशासन को बेहतर बनाने के लिए अभी और व्यापक सुधारों की आवश्यकता है। वहीं, सरगुजा और बीजापुर जिलों ने क्रमशः दूसरा और तीसरा स्थान प्राप्त किया है, जबकि कोरबा, कोंडागांव, नारायणपुर और सुकमा जिले इस सूची में सबसे नीचे रहे हैं।
परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (पी.जी.आई. 2.0) 2025-26 की जिलावार रिपोर्ट में प्रदेश के जिलों को दो मुख्य श्रेणियों ‘प्रचेष्टा-1’ और ‘प्रचेष्टा-2’ में बांटा गया है। ‘प्रचेष्टा-1’ श्रेणी के अंतर्गत रायगढ़ 329 अंकों के साथ शीर्ष पर है, जिसके बाद सरगुजा (324), बीजापुर (323), दुर्ग (320), जशपुर (319), महासमुंद (316), बस्तर (315), कांकेर (314), बिलासपुर (314), कोरिया (313), कवर्धा (313), बालोद (313), धमतरी (312), मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी (309), बलरामपुर (308), रायपुर (305), राजनांदगांव (303) और सारंगढ़ (301) शामिल हैं।
वहीं, ‘प्रचेष्टा-2’ श्रेणी में सूरजपुर और मुंगेली (300-300 अंक), मनेन्द्रगढ़-भरतपुर-चिरमिरी और बेमेतरा (299-299 अंक), दंतेवाड़ा (293), खैरागढ़-छुईखदान-गंडई (292), सक्ती (291), गरियाबंद और गौरेला पेंड्रा मरवाही (289-289 अंक), जांजगीर-चांपा (288), कोरबा (287), कोंडागांव (281), नारायणपुर (264) और सुकमा (255) जिले आते हैं। यह समग्र रैंकिंग प्रदेश के विभिन्न जिलों के शैक्षिक स्तर और उनके बुनियादी प्रदर्शन का मूल्यांकन करती है।
रिपोर्ट का निष्कर्ष स्पष्ट है कि छत्तीसगढ़ में शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए केवल प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। शिक्षण पद्धतियों, शिक्षकों के प्रशिक्षण और शिक्षा प्रशासन को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए व्यापक स्तर पर सुधार की आवश्यकता है। जशपुर जैसे जिलों का ‘प्रचेष्टा-1’ श्रेणी में आना यह दर्शाता है कि सही दिशा में कदम उठाकर शैक्षिक मानकों को बेहतर बनाया जा सकता है।



