नई दिल्ली/रायपुर/भोपाल: देश के राज्यों की माली हालत सुधारने में आबकारी राजस्व (Excise Duty) एक बार फिर सबसे बड़ा संकटमोचक बनकर उभरा है। हाल ही में जारी नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) और महालेखा नियंत्रक (CGA) के अप्रैल और मई 2026 के आंकड़ों ने वित्तीय गलियारों में हलचल मचा दी है। नए वित्तीय वर्ष के शुरुआती दो महीनों में ही राज्यों के खजाने में शराब की बिक्री से रिकॉर्ड तोड़ पैसा आया है। इस रेस में जहां उत्तर प्रदेश और हरियाणा राष्ट्रीय स्तर पर छाए हुए हैं, वहीं मध्य भारत और पूर्वी राज्यों ने भी कमाई के नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं।

राष्ट्रीय स्तर पर उत्तर प्रदेश कुल कमाई के मामले में देश में सबसे आगे बना हुआ है। अपनी विशाल आबादी और हर कोने तक फैले मजबूत डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के दम पर यूपी सरकार ने सबसे ज्यादा एक्साइज ड्यूटी बटोरी है। दूसरी ओर, सालाना आधार पर सबसे तेज विकास दर दर्ज करके हरियाणा ने सबको चौंका दिया है। नई आबकारी नीति और साइबर सिटी गुरुग्राम-फरीदाबाद जैसे हाई-एंड मार्केट्स ने हरियाणा के राजस्व को रॉकेट बना दिया है।

अप्रैल और मई के महीनों में भीषण गर्मी के चलते मध्य भारत और पूर्वी राज्यों में भी लिक्विड कैश की बाढ़ आ गई है। मध्य प्रदेश इन चारों राज्यों में सबसे अधिक कमाई करने वाला राज्य बनकर उभरा है, जहां अनुमानित मासिक राजस्व 1,200 से 1,500 करोड़ रुपये रहा। एमपी की ‘कंपोजिट शॉप प्रणाली’ (जहां एक ही छत के नीचे देसी और विदेशी दोनों शराब मिलती है) सुपर-हिट साबित हुई है और इंदौर-भोपाल जैसे बड़े शहरों ने सरकार के खजाने को लबालब भर दिया है। ओडिशा ने भी तकनीकी सुधारों के जरिए शानदार ग्रोथ की है और उसका अनुमानित मासिक राजस्व 800 से 1,000 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। वहां e-Abkari पोर्टल और डिजिटल ट्रैकिंग की वजह से टैक्स चोरी पर पूरी तरह लगाम लग गई है, साथ ही पुरी और भुवनेश्वर जैसे टूरिस्ट हब में प्रीमियम ब्रांड्स की मांग ने राजस्व को तगड़ा बूस्ट दिया।

छत्तीसगढ़ की बात करें तो वहां अनुमानित मासिक राजस्व 550 से 700 करोड़ रुपये के बीच रहा। राज्य में शराब का पूरा कारोबार सरकारी निगम (CSMCL) के हाथों में होने के कारण बिचौलियों का खेल खत्म है और पूरा मुनाफा सीधे सरकार की जेब में जा रहा है। इस बार अप्रैल-मई की रिकॉर्ड तोड़ गर्मी में बीयर की बिक्री 20-25% तक उछल गई, जिसने राजस्व का पारा भी चढ़ा दिया। वहीं झारखंड का आबकारी विभाग नए रिटेल टेंडर्स और कड़े नियमों के बाद अब पूरी तरह रिकवरी मोड में आ चुका है, जहां अनुमानित मासिक राजस्व 450 से 550 करोड़ रुपये रहा। राज्य के कोयला और औद्योगिक गढ़—धनबाद, रांची, बोकारो और जमशेदपुर—इस कमाई के मुख्य केंद्र रहे।

आर्थिक जानकारों का कहना है कि जब से देश में GST लागू हुआ है, राज्यों के पास खुद से टैक्स वसूलने के रास्ते बेहद सीमित हो गए हैं। चूंकि शराब और पेट्रोल-डीजल को GST के दायरे से बाहर रखा गया है, इसलिए राज्य सरकारें अपनी मर्जी से इन पर ड्यूटी तय करती हैं। यह आबकारी कमाई राज्यों के ‘स्वयं के कर राजस्व’ का लगभग 15% से 22% तक होती है। सरकारें इसी तुरंत मिलने वाले नकद (Instant Cash Flow) का इस्तेमाल अपनी लोक-कल्याणकारी योजनाओं, लाडली बहनों या किसानों की सब्सिडी देने, और चमचमाती सड़कों व पुलों के निर्माण में करती हैं।

 

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