*संवाददाता उमेश कुमार प्रजापति अंम्बिकापुर* सीतापुर मैनपाट कृषि विज्ञान केंद्र, मैनपाट द्वारा जामुन प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने तथा ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को कृषि आधारित स्वरोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। प्रशिक्षण में क्षेत्र के 113 किसान भाई-बहनों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर जामुन की वैज्ञानिक खेती, प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन की आधुनिक तकनीकों की जानकारी प्राप्त की।
कार्यक्रम में कृषि विशेषज्ञ श्री प्रदीप कुमार लकड़ा ने बताया कि सीतापुर, मैनपाट के तराई क्षेत्र तथा बतौली क्षेत्र की जलवायु और मिट्टी जामुन की खेती के लिए अत्यंत उपयुक्त है। इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में जामुन के पौधे लगे हुए हैं। उन्होंने बताया कि स्थानीय किसान प्रतिवर्ष जामुन का उत्पादन कर अन्य राज्यों के व्यापारियों को विक्रय कर रहे हैं। इस वर्ष सीतापुर क्षेत्र से लगभग 250 से 270 पिकअप जामुन अन्य राज्यों के बाजारों में भेजा जा चुका है। उन्होंने किसानों को जामुन की वैज्ञानिक खेती, बागवानी प्रबंधन तथा उत्पादन बढ़ाने की आधुनिक तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी।
कृषि वैज्ञानिक डॉ. चंद्रमनी साहू ने जामुन के पोषण महत्व एवं प्रसंस्करण की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सरगुजा क्षेत्र में जामुन प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है। यदि किसान इसके प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन पर ध्यान दें तो जैम, स्क्वैश, सिरका सहित विभिन्न उत्पाद तैयार कर बेहतर आय अर्जित कर सकते हैं। उन्होंने जामुन में लगने वाले प्रमुख कीटों की पहचान तथा उनके प्रभावी प्रबंधन के उपायों की भी जानकारी दी।
वहीं कृषि वैज्ञानिक डॉ. सूरज चंद्र पंकज ने किसानों को जामुन की वैज्ञानिक खेती की तकनीकों से अवगत कराया। उन्होंने जामुन से जैम, स्क्वैश, सिरका एवं अन्य मूल्य संवर्धित उत्पाद तैयार करने की विधियों का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया, जिससे प्रतिभागियों को स्वरोजगार के नए अवसरों की जानकारी मिली। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान किसानों ने विशेषज्ञों से सीधे संवाद कर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। विशेषज्ञों ने बताया कि जामुन का वैज्ञानिक उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन अपनाकर ग्रामीण युवा एवं महिलाएं कृषि आधारित लघु उद्योग स्थापित कर आत्मनिर्भर बन सकते हैं। कार्यक्रम में किसानों ने भविष्य में जामुन आधारित उद्यम शुरू करने में भी रुचि दिखाई।



