छत्तीसगढ़ शासन ने कार्यस्थल पर महिला कर्मचारियों की गरिमा, सम्मान और सुरक्षित वातावरण को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है। लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने बेमेतरा जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. अमृतलाल रोहलेंडर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ प्रदेश एनएचएम कर्मचारी संघ द्वारा मामले को शासन-प्रशासन के समक्ष प्रमुखता से उठाने और विरोध में दिए गए एकदिवसीय धरने के बाद जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई है।
डॉ. रोहलेंडर के विरुद्ध स्वास्थ्य विभाग को गंभीर लिखित शिकायतें प्राप्त हुई थीं, जिनमें सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (CHO) के साथ लगातार अभद्र व आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने, महिला सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों के प्रति अशोभनीय व अमर्यादित टिप्पणियां करने तथा अनुचित स्पर्श किए जाने के बेहद गंभीर आरोप शामिल थे। शासन द्वारा गठित जांच दल ने संबंधित अधिकारियों व पीड़ित महिला कर्मचारियों के विधिवत बयान दर्ज किए और जांच प्रतिवेदन में प्रथम दृष्टया आरोपों की पुष्टि होने के बाद शासन ने अनुशासनात्मक कदम उठाया।
लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि संबंधित अधिकारी का यह कृत्य छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम-3 के सीधे उल्लंघन तथा गंभीर कदाचरण की श्रेणी में आता है। इसी आधार पर छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 9(1)(क) के तहत डॉ. अमृतलाल रोहलेंडर को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश जारी किया गया है।
शासन की त्वरित कार्रवाई के बाद छत्तीसगढ़ प्रदेश एनएचएम कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमित मिरी ने स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल और राज्य शासन के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि कार्यस्थल पर प्रत्येक कर्मचारी, विशेषकर महिला कर्मियों की गरिमा, आत्मसम्मान और सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना किसी भी संस्थान की बुनियादी जिम्मेदारी है। संघ ने स्पष्ट किया कि उनका मकसद किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि महिला कर्मचारियों के अधिकारों और सम्मान की रक्षा करना था, और उन्हें उम्मीद है कि आगामी प्रक्रियाएं भी पूरी निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ संपन्न होंगी।



