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नई दिल्ली/वाराणसी: सूर्य देव के धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते ही आज पूरे भारत में मकर संक्रांति का पावन पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। कड़ाके की ठंड और सुबह के घने कोहरे के बीच भी जन-उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। तड़के सुबह से ही हरिद्वार के हर की पौड़ी से लेकर प्रयागराज के संगम तट और काशी के घाटों तक श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। ‘हर-हर गंगे’ के जयघोष के बीच लाखों लोगों ने पवित्र नदियों में स्नान कर सूर्य देव को अर्घ्य दिया और अपने परिवार की खुशहाली की कामना की।
धार्मिक दृष्टि से इस दिन का विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि आज से सूर्य उत्तरायण हो रहे हैं, जिसके साथ ही पिछले एक महीने से चला आ रहा ‘खरमास’ समाप्त हो गया है और अब विवाह व मुंडन जैसे शुभ कार्यों की शुरुआत हो सकेगी। मंदिरों के बाहर लंबी कतारें देखी जा रही हैं, जहाँ लोग तिल, गुड़, चावल और दाल का दान कर पुण्य कमा रहे हैं।
पर्व की विविधता को देखें तो उत्तर भारत में जहाँ आज घर-घर में खिचड़ी का भोग लगाया जा रहा है, वहीं गुजरात और राजस्थान के आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से सजे हुए हैं। छतों पर ‘कापो छे’ के शोर और संगीत की गूँज के बीच बच्चे और युवा पतंगबाजी का आनंद ले रहे हैं। दक्षिण भारत में इसे पोंगल के रूप में बेहद सादगी और प्राकृतिक वैभव के साथ मनाया जा रहा है, जहाँ नई फसल के आगमन पर प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त किया जा रहा है।
बाजारों में भी इस अवसर पर विशेष हलचल है। तिल के लड्डू और गजक की महक गलियों में बिखरी हुई है। सुरक्षा के लिहाज से प्रशासन ने भी पुख्ता इंतजाम किए हैं, विशेषकर स्नान घाटों पर गोताखोरों और पुलिस बल की तैनाती की गई है ताकि श्रद्धालु सुरक्षित तरीके से अपनी आस्था पूरी कर सकें। प्रधानमंत्री और अन्य गणमान्य नेताओं ने भी देशवासियों को इस महान पर्व की बधाई देते हुए इसे साझा संस्कृति और एकता का प्रतीक बताया है।
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