1 जून से देशभर में शुरू होगा ‘खेत बचाओ अभियान’

रायपुर/ब्यूरो:

देश और प्रदेश के दवा बाजार से एक बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आ रही है। गर्भवती महिलाओं का लेबर पेन (प्रसव पीड़ा) बढ़ाने के लिए इस्तेमाल होने वाले ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन समेत सर्दी-बुखार में अत्यधिक उपयोग की जाने वाली चार अन्य दवाएं सरकारी जांच में अमानक पाई गई हैं। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) और प्रयोगशाला की रिपोर्ट मिलने के बाद खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए इन दवाओं के संबंधित बैच के उपयोग, भंडारण और बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। प्रशासन ने सभी अस्पतालों, थोक विक्रेताओं और दवा दुकानों को निर्देश जारी किए हैं कि यदि उनके पास इन संदिग्ध बैच की दवाएं उपलब्ध हैं, तो उनका वितरण तुरंत बंद कर स्थानीय औषधि नियंत्रण कार्यालय को सूचित करें।

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इस पूरे मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन की जांच का दायरा राजस्थान के कोटा से जुड़ा हुआ है। पिछले दिनों कोटा में पांच प्रसूताओं की संदिग्ध मौत के बाद इस इंजेक्शन को संदेह के घेरे में लाया गया था। जब बाजार में उपलब्ध इस इंजेक्शन के एक विशेष बैच की गहन जांच कराई गई, तो भारत के महानियंत्रक (DCGI) ने इसे गंभीर रूप से अमानक और खतरनाक पाया। इसी रिपोर्ट को आधार बनाते हुए बैच नंबर आई-7881 के ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है।

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इसी अभियान के तहत खाद्य एवं औषधि प्रशासन की टीम ने समय-समय पर संदेह के आधार पर बाजार से सर्दी, खांसी और बुखार में आमतौर पर दी जाने वाली पैरासिटामाल कॉम्बिनेशन की दवाओं के सैंपल भी एकत्र किए थे। कालीबाड़ी स्थित शासकीय लैब में हुई जांच के दौरान चार प्रमुख ब्रांड की दवाओं को ‘मिसब्रांड’ पाया गया है। औषधि विशेषज्ञों के अनुसार मिसब्रांड का अर्थ यह है कि हालांकि इन दवाओं की आंतरिक रासायनिक गुणवत्ता तो ठीक है, लेकिन इनकी पैकिंग, लेबलिंग अथवा ब्रांडिंग की जानकारी सरकारी मानकों के अनुरूप नहीं है, जिसके कारण इन्हें भी अमानक की श्रेणी में रखकर प्रतिबंधित किया गया है।

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अमानक घोषित की गई दवाओं में उत्तराखंड में निर्मित ‘नाक्पेन-पी टेबलेट’ (असेक्लोफेनेक एवं पैरासीटामाल कॉम्बिनेशन, बैच नंबर एमटी-250777), राजस्थान में निर्मित ‘पलामो स्टार-एपी टेबलेट्स’ (असेक्लोफेनेक एवं पैरासीटामाल, बैच नंबर एसएआई-25029), हिमाचल प्रदेश की ‘एसीएचई-पी टेबलेट्स’ (असेक्लोफेनेक एवं पैरासीटामाल, बैच नंबर एलवी 25डीटी-066बी) और हिमाचल प्रदेश में ही बनी ‘कोल्डजिया टेबलेट्स’ (बैच नंबर जीटी-25294ए) शामिल हैं।

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इस संवेदनशील मामले को देखते हुए खाद्य एवं औषधि प्रशासन के नियंत्रक दीपक अग्रवाल ने प्रदेश के सभी जिला औषधि नियंत्रण अधिकारियों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने अधिकारियों को फील्ड पर उतरकर सतर्कता, निगरानी और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि इन प्रतिबंधित बैच की एक भी गोली मरीजों तक न पहुंचे। प्रशासन ने साफ किया है कि यदि किसी भी स्तर पर इन संदिग्ध दवाओं का भंडारण या अवैध विक्रय पाया जाता है, तो संबंधित एजेंसी या संचालक के खिलाफ औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम के तहत सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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