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विशेष प्रतिनिधि | रायपुर

छत्तीसगढ़ में मकान मालिकों और किरायेदारों के बीच के रिश्तों को अधिक पारदर्शी, संतुलित और विवादमुक्त बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। छत्तीसगढ़ विधानसभा ने आज ‘छत्तीसगढ़ भाड़ा नियंत्रण (संशोधन) विधेयक, 2026’ को सर्वसम्मति से पारित कर दिया।

केंद्र सरकार के ‘आदर्श किरायेदारी अधिनियम, 2021’ की तर्ज पर तैयार किया गया यह नया कानून राज्य की बदलती सामाजिक-आर्थिक जरूरतों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। नए प्रावधानों के लागू होने से न केवल अदालतों का बोझ कम होगा, बल्कि किरायेदारी के क्षेत्र में सुशासन और त्वरित न्याय की एक नई शुरुआत होगी।

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नए कानून की 5 बड़ी और महत्वपूर्ण बातें:

  • विधिक उत्तराधिकारियों पर भी लागू होगा एग्रीमेंट: अब किरायेदारी का अनुबंध (Rent Agreement) केवल मूल पक्षकारों तक सीमित नहीं रहेगा। मकान मालिक या किरायेदार की मृत्यु होने या अन्य विशेष परिस्थितियों में भी यह अनुबंध उनके कानूनी उत्तराधिकारियों पर पूरी तरह लागू रहेगा। इससे अनावश्यक विवादों पर लगाम लगेगी।

  • ‘प्रॉपर्टी मैनेजर’ को पहली बार मिली कानूनी मान्यता: बदलते दौर में संपत्तियों की देखरेख करने वाले ‘प्रॉपर्टी मैनेजर्स’ को कानून के दायरे में लाया गया है। संशोधन में पहली बार संपत्ति प्रबंधक की कानूनी परिभाषा तय करते हुए उनके अधिकारों, दायित्वों और उनके द्वारा किए जाने वाले दुरुपयोग पर कार्रवाई के स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं।

  • किराया जमा करने की नई और सुरक्षित व्यवस्था: कई बार मकान मालिक द्वारा जानबूझकर किराया न लेने की शिकायतें आती हैं। अब यदि मकान मालिक किसी कारणवश किराया स्वीकार नहीं करता है, तो किरायेदार के लिए निर्धारित सरकारी प्रक्रिया के तहत किराया जमा करने का विकल्प होगा, जिससे उनके कानूनी अधिकार सुरक्षित रहेंगे।

  • 60 दिनों के भीतर होगा विवादों का निपटारा: भाड़ा नियंत्रण अधिकरण (Rent Control Tribunal) को और अधिक शक्तिशाली और समयबद्ध बनाया गया है। अब मामलों को बेवजह टालना मुमकिन नहीं होगा। मुकदमेबाजी के दौरान अधिकतम तीन बार ही स्थगन (Adjournment) मिल सकेगा और यथासंभव 60 दिनों के भीतर मामले का निराकरण करना अनिवार्य होगा।

  • अधिकरण को मिलीं सिविल कोर्ट की शक्तियां: अधिकरण की कार्यप्रणाली को प्रभावी बनाने के लिए उसे सिविल न्यायालय (Civil Court) के समान समन जारी करने और गवाहों को बुलाने सहित सभी आवश्यक कानूनी शक्तियां प्रदान की गई हैं।

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“यह संशोधन राज्य में किरायेदारी व्यवस्था को अधिक विश्वसनीय और न्यायसंगत बनाएगा। इससे मकान मालिकों का भरोसा बढ़ेगा, किरायेदारों के अधिकार सुरक्षित होंगे और रेंटल मार्केट को नई गति मिलेगी।”

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सुशासन और त्वरित न्याय का नया मील का पत्थर

जानकारों का मानना है कि इस ऐतिहासिक संशोधन के बाद छत्तीसगढ़ में रेंटल हाउसिंग सेक्टर में निवेश बढ़ेगा। मकान मालिकों में अपनी संपत्ति किराये पर देने को लेकर झिझक खत्म होगी, वहीं किरायेदारों को भी मानसिक प्रताड़ना से मुक्ति मिलेगी। विधानसभा से पारित होने के बाद अब इसे अमलीजामा पहनाने की तैयारी शुरू कर दी गई है।

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