महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 के माध्यम से देश भर के आंगनवाड़ी केंद्रों के बुनियादी ढांचे में आमूल-चूल परिवर्तन की तैयारी कर ली है। इसके तहत मंत्रालय ने केंद्रों में पेयजल सुविधाओं और शौचालयों के लिए मिलने वाली वित्तीय सहायता में उल्लेखनीय वृद्धि की है। अब पेयजल सुविधाओं के लिए आवंटन 10,000 रुपये से बढ़ाकर 17,000 रुपये और शौचालयों के निर्माण के लिए 12,000 रुपये से बढ़ाकर 36,000 रुपये कर दिया गया है।
आधुनिक भवनों की कमी को दूर करने के लिए एमजीएनआरईजीएस (MGNREGS) के सहयोग से पांच वर्षों में 50,000 नए आंगनवाड़ी भवनों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है, जिसके तहत हर साल 10,000 केंद्र बनाए जाएंगे। प्रत्येक भवन के लिए 12 लाख रुपये की राशि निर्धारित की गई है, जिसमें मनरेगा, 15वें वित्त आयोग और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय अपनी हिस्सेदारी देंगे। इसके साथ ही, राज्यों को प्रोत्साहित किया गया है कि वे सांसद निधि (MPLADS) और ग्रामीण अवसंरचना विकास कोष जैसे अन्य संसाधनों से भी अतिरिक्त धनराशि जुटाएं।
सरकार की योजना 15वें वित्त आयोग के कार्यकाल के दौरान दो लाख आंगनवाड़ी केंद्रों को ‘सक्षम आंगनवाड़ी’ के रूप में उन्नत करने की है। इन केंद्रों को आधुनिक तकनीक और बेहतर वातावरण से लैस किया जाएगा, जिसमें एलईडी स्क्रीन, जल शोधन प्रणाली और बच्चों के सीखने के लिए विशेष ‘बाला’ (BaLA) पेंटिंग शामिल होंगी। विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के लिए ‘पीएम जनमन योजना’ और सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ के तहत भी सैकड़ों नए केंद्रों को मंजूरी दी गई है।
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शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाने के लिए मंत्रालय ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए आंगनवाड़ी केंद्रों को सरकारी प्राथमिक स्कूलों के भीतर स्थापित करने या उनसे जोड़ने के निर्देश जारी किए हैं। चूंकि यह एक केंद्र प्रायोजित योजना है, इसलिए इसका सफल क्रियान्वयन राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है। रिक्त पदों को भरने और सेवाओं की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार लगातार राज्यों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से संवाद कर रही है, जिसकी पूरी रिपोर्ट ‘पोषण ट्रैकर’ पोर्टल पर उपलब्ध कराई गई है।

