रायपुर
प्रदेश में एक बार फिर बड़ा कर्मचारी आंदोलन होने जा रहा है। विधानसभा चुनाव के दो वर्ष बीत जाने के बावजूद कर्मचारियों से जुड़ी प्रमुख मांगें पूरी नहीं होने से राज्य के साढ़े पांच लाख से अधिक कर्मचारी अधिकारी सरकार के खिलाफ आंदोलन के मूड में हैं। संविदा कर्मचारी, मध्याह्न भोजन कर्मचारी, स्कूल सफाई कर्मचारी, पटवारी, शिक्षक, पशु चिकित्सा अधिकारी, डीईओ, बीईओ, सीईओ, तहसीलदार, डिप्टी कलेक्टर, राजस्व अधिकारी, क्लर्क, लेखापाल सहित लगभग सभी विभागों के कर्मचारी अधिकारी इस आंदोलन में शामिल होंगे।
छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के प्रदेश संयोजक कमल वर्मा सहित प्रदेश पदाधिकारी राजेश चटर्जी, चंद्रशेखर तिवारी, केदार जैन, राजनारायण द्विवेदी और जाकेश साहू ने संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि कर्मचारियों की लंबित और उपेक्षित मांगों को लेकर आगामी 29 दिसंबर से प्रदेशव्यापी हड़ताल शुरू की जाएगी।
उन्होंने बताया कि 29, 30 और 31 दिसंबर को प्रदेश के सभी 33 जिला मुख्यालयों में तीन दिवसीय निश्चितकालीन आंदोलन आयोजित किया जाएगा। संगठन ने प्रदेश के सभी कर्मचारी अधिकारियों से जिला मुख्यालयों में पहुंचकर एकजुटता के साथ अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद करने की अपील की है।
फेडरेशन ने बताया कि केंद्र सरकार के समान देय तिथि से महंगाई भत्ता और लंबित एरियर्स का भुगतान लंबे समय से रोका गया है जिससे कर्मचारियों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। प्रदेश के लगभग दो लाख शिक्षक एलबी संवर्ग को प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा गणना का लाभ नहीं मिल पा रहा है जिससे वे लगातार नुकसान में हैं। सहायक शिक्षकों की वेतन विसंगति सहित विभिन्न विभागों में व्याप्त वेतन विसंगतियां अब तक दूर नहीं की गई हैं। बेहतर सेवा शर्तों और सेवा शर्तों में सुधार की मांग भी लंबे समय से लंबित है।
वीएसके विद्या समीक्षा केंद्र के अंतर्गत शिक्षकों के निजी मोबाइल से ऑनलाइन हाजिरी व्यवस्था का भी पुरजोर विरोध किया जाएगा। संगठन का कहना है कि इस व्यवस्था से निजी जानकारी लीक होने और खातों से राशि निकलने का खतरा बना हुआ है। वहीं निजी द्वेष और झूठी शिकायतों के आधार पर बिना जांच कर्मचारियों और शिक्षक नेताओं को निलंबित किए जाने से भारी नाराजगी है। इसे कर्मचारी नेतृत्व को दबाने की कोशिश बताया गया है। संगठन ने राज्य में अघोषित प्रशासनिक तानाशाही का आरोप भी लगाया है।
प्रदेश के एक लाख अस्सी हजार शिक्षक एलबी संवर्ग का प्रतिनिधित्व करने वाले विभिन्न संगठनों के प्रदेश अध्यक्षों ने भी संयुक्त रूप से आंदोलन को समर्थन दिया है। उन्होंने समस्त शिक्षक एलबी संवर्ग से सेवा गणना का लाभ दिलाने, सहायक शिक्षकों की वेतन विसंगति दूर कराने, लंबित महंगाई भत्ता और एरियर्स भुगतान सहित सभी मांगों के लिए 29 से 31 दिसंबर तक होने वाले आंदोलन में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की है।
सरकार के लिए यह आंदोलन एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है क्योंकि इतने बड़े पैमाने पर कर्मचारी अधिकारियों के सड़कों पर उतरने से प्रशासनिक और शैक्षणिक व्यवस्था पर व्यापक असर पड़ने की संभावना है।

