अम्बिकापुर 21 जुलाई 2026/ विकसित भारत जी राम जी योजना के अंतर्गत सरगुजा जिले में जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन के उद्देश्य से संचालित ‘मोर गांव, मोर पानी महाअभियान’ प्रभावी परिणाम देने लगा है। अभियान के तहत जिले के विभिन्न क्षेत्रों में वर्षा जल के संरक्षण एवं भू-जल पुनर्भरण के लिए वैज्ञानिक पद्धति से संरचनाओं का निर्माण कराया जा रहा है। इसी क्रम में जनपद पंचायत अंबिकापुर की ग्राम पंचायत कांतिप्रकाशपुर के पहाड़ी क्षेत्र में 600 स्टैगर्ड कंटूर ट्रेंच (SCT) का निर्माण किया गया है, जो आने वाले समय में जल संरक्षण, हरित आवरण बढ़ाने और कृषि को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
कलेक्टर श्री अजीत वसंत के निर्देशन तथा जिला पंचायत सीईओ श्री विनय कुमार अग्रवाल के मार्गदर्शन में यह कार्य तेजी से पूरा किया गया। पहाड़ी ढलानों पर रिज टू वैली अवधारणा अंर्तगत वैज्ञानिक तकनीक के आधार पर कंटूर लाइन के अनुरूप जिग-जैग स्वरूप में निर्मित स्टैगर्ड कंटूर ट्रेंच वर्षा जल को रोकने और उसे धीरे-धीरे भूमि के भीतर समाहित करने का कार्य करेंगे।
पूर्व में वर्षा के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों का अधिकांश पानी तेज बहाव के साथ नीचे की ओर बह जाता था, जिससे मिट्टी का कटाव होता था और वर्षा जल का समुचित उपयोग नहीं हो पाता था। अब इन ट्रेंचों के निर्माण से वर्षा जल का बहाव नियंत्रित होगा तथा पानी धीरे-धीरे जमीन में रिसकर भू-जल स्तर को बढ़ाने में सहायक होगा। इससे प्राकृतिक जल स्रोतों का पुनर्भरण होगा और भविष्य में पेयजल उपलब्धता भी बेहतर होगी।
अभियान के तहत किए गए कार्यों से पहाड़ी क्षेत्र का स्वरूप भी बदलता दिखाई दे रहा है। जहां पहले पहाड़ी ढलान बंजर और सूखी दिखाई देती थी, वहीं अब व्यवस्थित रूप से निर्मित स्टैगर्ड कंटूर ट्रेंच और बढ़ती हरियाली इस पहल की सफलता को दर्शा रही है। निर्माण से पहले और निर्माण के बाद की तस्वीरों में इस परिवर्तन को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।
स्टैगर्ड कंटूर ट्रेंच जल संरक्षण की एक वैज्ञानिक एवं प्रभावी तकनीक है, जिसके माध्यम से वर्षा जल को रोककर भूमि के भीतर समाहित किया जाता है। इससे भू-जल स्तर में वृद्धि होती है, मिट्टी का कटाव कम होता है, भूमि की उर्वरता बनी रहती है तथा वनस्पति और हरियाली को बढ़ावा मिलता है। इसके साथ ही आसपास के जल स्रोतों का पुनर्भरण होने से कृषि कार्यों को भी दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।
शासन द्वारा संचालित ‘मोर गांव, मोर पानी महाअभियान’ जल संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने का महत्वपूर्ण प्रयास है। अभियान के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरचनाओं का निर्माण कर प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ-साथ भविष्य की जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए स्थायी समाधान विकसित किए जा रहे हैं। इससे आने वाले वर्षों में पेयजल उपलब्धता सुनिश्चित होने, कृषि उत्पादन में वृद्धि, पर्यावरण संरक्षण तथा ग्रामीण आजीविका को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
जिला प्रशासन ने नागरिकों से भी अपील की है कि जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाते हुए प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें, ताकि सरगुजा को जल समृद्ध और हरित जिला बनाने का संकल्प साकार हो सके।

