बच्चों और किशोरों में बढ़ता स्मार्टफोन और डिजिटल उपकरणों का इस्तेमाल उनकी पढ़ाई और शैक्षणिक प्रदर्शन पर असर डाल रहा है। आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) के PISA 2025 आकलन में 91 देशों के करीब 7.6 लाख 15 वर्षीय छात्रों को शामिल किया गया। रिपोर्ट में पढ़ने, गणित और विज्ञान—तीनों विषयों में छात्रों के प्रदर्शन में गिरावट सामने आई है।
पढ़ने की क्षमता में भी बड़ी गिरावट
आकलन के मुताबिक, छात्रों का औसत रीडिंग स्कोर 2012 के 501 अंक से घटकर 466 अंक रह गया है। विशेषज्ञों ने बढ़ते स्क्रीन टाइम और पढ़ने के लिए घटते समय को इसके प्रमुख कारणों में शामिल किया है। रिपोर्ट के अनुसार, छात्र अब टेक्स्ट को पहले की तुलना में अधिक तेजी से पढ़ रहे हैं और जल्दबाजी में गलत जवाब देने की संभावना भी बढ़ी है।
मैथ्स और साइंस में भी गिरा प्रदर्शन
छात्रों के गणित और विज्ञान के प्रदर्शन में भी गिरावट दर्ज की गई। विज्ञान का औसत स्कोर 2009 में 506 से घटकर 486 और गणित का स्कोर 502 से घटकर 469 रह गया। OECD के मुताबिक, डिजिटल उपकरणों के कारण कक्षा में होने वाला ध्यान भटकाव भी कमजोर शैक्षणिक प्रदर्शन से जुड़ा पाया गया है।
5 घंटे से ज्यादा स्क्रीन टाइम पर बढ़ी चिंता
OECD देशों में छात्र हर कार्यदिवस औसतन करीब 3.4 घंटे मनोरंजन के लिए डिजिटल डिवाइस पर बिताते हैं। इसके अलावा पढ़ाई के लिए भी करीब तीन घंटे डिजिटल उपकरणों का इस्तेमाल होता है। रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि डिजिटल डिवाइस पढ़ाई में मददगार हो सकते हैं, लेकिन 5 घंटे से अधिक इस्तेमाल होने पर छात्रों के परिणाम कमजोर पड़ने लगते हैं।
AI चैटबॉट का इस्तेमाल भी बढ़ा
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि करीब आधे छात्र पढ़ाई के लिए AI चैटबॉट का इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि, निबंध लिखने, सारांश बनाने या शोध जैसे कामों के लिए AI का इस्तेमाल करने वाले छात्रों का विज्ञान स्कोर औसतन 20 अंक कम रहा।
