रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा बच्चों और महिलाओं के पोषण व शिक्षा के लिए संचालित आंगनवाड़ी केंद्रों की नवीनतम सांख्यिकीय रिपोर्ट (प्रपत्र-अ) सामने आई है। विधानसभा में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में प्रदेश के 33 जिलों में कुल 52,559 आंगनवाड़ी केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। हालांकि, रिपोर्ट का एक चिंताजनक पहलू यह भी है कि इनमें से 14,065 केंद्र अब भी अपने स्वयं के भवन विहीन हैं, जो किराए के कमरों या अन्य वैकल्पिक स्थानों पर चल रहे हैं।
जशपुर और रायगढ़ में सबसे बड़ा नेटवर्क प्रदेश में आंगनवाड़ी केंद्रों की संख्या के मामले में जशपुर जिला सबसे आगे है, जहाँ कुल 4,115 केंद्र संचालित हैं। इसके बाद रायगढ़ (2,709), कोरबा (2,602) और सरगुजा (2,532) का स्थान आता है। इन बड़े जिलों में संचालित केंद्रों की संख्या दर्शाती है कि वनांचल और दूरस्थ क्षेत्रों में बच्चों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने के लिए एक व्यापक ढांचा तैयार किया गया है।
भवन विहीन केंद्रों की स्थिति: जशपुर और कोरबा में सर्वाधिक कमी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि जहाँ केंद्रों की संख्या ज्यादा है, वहीं भवनों की कमी भी उन्हीं जिलों में अधिक है। जशपुर में सर्वाधिक 1,518 केंद्र भवन विहीन हैं। इसी तरह कोरबा में 1,127, सरगुजा में 932 और रायगढ़ में 770 केंद्रों के पास अपना स्वयं का भवन नहीं है। राजधानी रायपुर में भी 1,941 केंद्रों में से 653 केंद्र अब भी भवन विहीन श्रेणी में दर्ज किए गए हैं।
स्वयं के भवनों में संचालित केंद्र अच्छी खबर यह है कि प्रदेश के 38,494 केंद्र अपने स्वयं के पक्के भवनों में सफलतापूर्व संचालित हो रहे हैं। इस मामले में भी जशपुर (2,597), रायगढ़ (1,939) और बस्तर (1,804) जैसे जिले अग्रणी हैं। महासमुंद जिले में स्थिति काफी बेहतर है, जहाँ 1,793 केंद्रों में से 1,603 केंद्रों के पास अपने भवन मौजूद हैं। छोटे जिलों में खैरागढ़-छुईखदान-गण्डई में सबसे कम केवल 108 केंद्र ही भवन विहीन हैं।



