भारत सरकार के पंचायती राज मंत्रालय द्वारा पंचायतों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से एक व्यापक योजना संचालित की जा रही है, जिसका मुख्य केंद्र ‘संशोधित राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान’ (आरजीएसए) है। इस पहल के माध्यम से उन पंचायतों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जा रहा है, जो विकास के विभिन्न मानकों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं। केंद्र सरकार इन पंचायतों को उनकी श्रेणी और प्रदर्शन के आधार पर 50 लाख रुपये से लेकर 5 करोड़ रुपये तक की महत्वपूर्ण वित्तीय प्रोत्साहन राशि प्रदान कर रही है।

सतत विकास लक्ष्यों पर केंद्रित मूल्यांकन

​वर्तमान में इन पुरस्कारों का आधार सतत विकास लक्ष्यों (LSDG) का स्थानीयकरण है। इसके अंतर्गत पंचायतों के कार्यों का मूल्यांकन कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में किया जाता है, जिनमें गरीबी उन्मूलन, स्वास्थ्य सेवाएं, महिला एवं बाल विकास, जल प्रबंधन, और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषय शामिल हैं। इसके साथ ही, पंचायतों में सुशासन को बढ़ावा देने और बुनियादी ढांचे के विकास को भी प्राथमिकता दी गई है। वर्ष 2023, 2024 और 2025 के दौरान कई पंचायतों ने इन श्रेणियों में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है।

डिजिटल बुनियादी ढांचा और आधुनिकीकरण

​पंचायतों को आधुनिक और डिजिटल बनाने की जिम्मेदारी प्राथमिक रूप से राज्य सरकारों की है, लेकिन केंद्र सरकार आरजीएसए योजना के जरिए इसमें सक्रिय सहयोग कर रही है। उदाहरण के तौर पर, पंजाब में अब तक 759 ग्राम पंचायत भवनों के निर्माण और हजारों कंप्यूटरों की उपलब्धता के लिए वित्तीय सहायता दी गई है। दूरसंचार विभाग के ‘भारतनेट’ कार्यक्रम के माध्यम से देश भर की ग्राम पंचायतों को अंतिम छोर तक ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी से जोड़ा जा रहा है, ताकि डिजिटल सेवाओं का लाभ हर ग्रामीण तक पहुंच सके।

ई-गवर्नेंस और पारदर्शिता में सुधार

​शासन में पारदर्शिता और दक्षता लाने के लिए मंत्रालय ‘ई-पंचायत मिशन मोड परियोजना’ को लागू कर रहा है। ‘ई-ग्रामस्वराज’ एप्लीकेशन ने पंचायत स्तर पर योजना बनाने, लेखांकन और ऑनलाइन भुगतान की प्रक्रिया को बेहद सरल बना दिया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान, देश भर की ढाई लाख से अधिक ग्राम पंचायतों ने अपनी विकास योजनाएं ऑनलाइन अपलोड की हैं। इसके अतिरिक्त, ‘मेरी पंचायत’ और ‘पंचायत निर्णय’ जैसे मोबाइल ऐप के माध्यम से ग्राम सभाओं के संचालन और कार्यों की प्रगति की जानकारी जनता के लिए पारदर्शी बनाई गई है।

वित्तीय प्रबंधन और ऑडिट

​पंचायतों के वित्तीय अनुशासन को मजबूत करने के लिए अप्रैल 2020 में ‘ऑडिटऑनलाइन’ एप्लीकेशन की शुरुआत की गई थी। इसके जरिए केंद्रीय वित्त आयोग की निधियों के उपयोग का पारदर्शी ऑडिट सुनिश्चित किया जा रहा है। अकेले पंजाब राज्य में ही वर्ष 2023-24 के लिए 13,272 ग्राम पंचायतों की ऑडिट रिपोर्ट ऑनलाइन तैयार की जा चुकी है, जो शासन के प्रति सरकार की जवाबदेही को प्रदर्शित करता है।

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