महासमुंद:
शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही और राजस्व रिकॉर्ड में मनमानी करने वाले कर्मचारियों पर प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। महासमुंद कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने राजस्व कार्यों की नियमित समीक्षा के बाद जिले के 5 पटवारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
डिजिटल फसल सर्वेक्षण का काम समय पर पूरा न करने, कारण बताओ नोटिस का संतोषजनक जवाब न देने और शासकीय जमीन के रिकॉर्ड में गड़बड़ी व गलत नामांतरण करने के गंभीर आरोपों के तहत यह प्रशासनिक कार्रवाई की गई है।
किन पर हुई कार्रवाई और क्या हैं आरोप?
| पटवारी का नाम | पदस्थ तहसील | निलंबन का मुख्य कारण |
| उदय प्रकाश राजपूत | बसना | डिजिटल फसल सर्वेक्षण का कार्य शुरू न करना व नोटिस का असंतोषजनक जवाब |
| कंचन साहू | बागबाहरा | 30 सितंबर की समय-सीमा बीतने के बाद भी सर्वेक्षण कार्य में लापरवाही |
| लुकेश यादव | बागबाहरा | शासकीय निर्देश के बावजूद डिजिटल फसल सर्वेक्षण शुरू न करना |
| जितेंद्र सिंह बाघ | सरायपाली | ग्राम पड़कीपाली में शासकीय भूमि को मनमर्जी से दूसरे कृषक के नाम दर्ज करना |
| हरीश चंद्राकर | महासमुंद | ग्राम बड़गांव में खसरा छुपाकर दोबारा नामांतरण और सर्वेक्षण का सत्यापन न करना |
30 सितंबर तक पूरा होना था काम, शुरू तक नहीं किया
राज्य शासन द्वारा वर्ष 2026-27 के डिजिटल फसल सर्वेक्षण को लेकर सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। इसके तहत सभी संबंधित प्रक्रियाओं को 30 सितंबर 2026 तक अनिवार्य रूप से पूरा करने के निर्देश दिए गए थे।
समीक्षा के दौरान पाया गया कि बसना और बागबाहरा तहसील के तीन पटवारियों—उदय प्रकाश राजपूत, कंचन साहू और लुकेश यादव ने तय समय बीत जाने के बाद भी काम शुरू ही नहीं किया था। उच्चाधिकारियों द्वारा स्पष्टीकरण मांगे जाने पर भी इन कर्मचारियों ने कोई समाधानकारक उत्तर प्रस्तुत नहीं किया।
सरकारी जमीन की बंदरबांट और गलत नामांतरण पर गिरी गाज
सर्वेक्षण में देरी के अलावा जमीन के अभिलेखों में गंभीर छेड़छाड़ का मामला भी सामने आया:सरायपाली तहसील के पटवारी जितेंद्र सिंह बाघ पर आरोप है कि उन्होंने ग्राम पड़कीपाली में शासकीय जमीन को नियमों को ताक पर रखकर अपनी मर्जी से एक अन्य कृषक के नाम पर पटवारी रिकॉर्ड में दर्ज कर दिया।महासमुंद तहसील के पटवारी हरीश चंद्राकर ने ग्राम बड़गांव में खसरा नंबर की वास्तविक स्थिति को छुपाया और नियमों के विपरीत जाकर दोबारा नामांतरण की प्रक्रिया की। इसके साथ ही उन्होंने डिजिटल फसल सर्वेक्षण का जमीनी (भौतिक) सत्यापन भी नहीं किया था।
कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने स्पष्ट किया है कि किसानों से जुड़े डिजिटल सर्वेक्षण और राजस्व रिकॉर्ड में किसी भी स्तर पर लापरवाही या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कार्य में कोताही बरतने वाले अन्य कर्मचारियों पर भी निगरानी रखी जा रही है।


