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नई दिल्ली:
केंद्र सरकार ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से तैयार होने वाले डीपफेक, फर्जी डिजिटल कंटेंट और भ्रामक पोस्ट्स पर नकेल कसने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी (IT) नियमों में व्यापक और सख्त संशोधन किए हैं। संसद में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने बताया कि एआई जनित फर्जी वीडियो, ऑडियो, फोटो और लिखित सामग्री के बढ़ते खतरों को देखते हुए आईटी कानून, भारतीय न्याय संहिता और आईटी नियम 2021 के कानूनी व तकनीकी ढांचे को मजबूत किया गया है।
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नियमों में मुख्य बदलाव और नई व्यवस्था
सरकार ने गैरकानूनी कंटेंट पर कार्रवाई की समय-सीमा में ऐतिहासिक कटौती की है ताकि फर्जी और नुकसानदेह कंटेंट को तेजी से फैलने से रोका जा सके:
| प्रावधान | पुरानी व्यवस्था | नई व्यवस्था |
| AI कंटेंट पहचान | ऐच्छिक / अस्पष्ट | स्पष्ट वाटरमार्क/लेबल और मेटाडेटा अनिवार्य |
| सरकारी/अदालती आदेश पर कंटेंट हटाना | 36 घंटे | 3 घंटे के भीतर |
| संवेदनशील शिकायतों का निवारण | 72 घंटे | 36 घंटे के भीतर |
| अत्यंत संवेदनशील मामले (अश्लील/बाल यौन शोषण) | 24 घंटे | 2 घंटे के भीतर |
| बड़ी सोशल मीडिया कंपनियां (50 लाख+ यूज़र्स) | सामान्य अनुपालन | शिकायत अधिकारी, अनुपालन रिपोर्ट व स्थानीय अधिकारी अनिवार्य |
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सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर नकेल और कार्रवाई
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कानूनी सुरक्षा (Safe Harbour) समाप्त होगी: यदि कोई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तय समय-सीमा के भीतर विवादित AI सामग्री को नहीं हटाता, तो उसे आईटी एक्ट की धारा 79 के तहत मिलने वाली कानूनी सुरक्षा समाप्त कर दी जाएगी और उसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
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स्वचालित निगरानी तंत्र: बड़े डिजिटल मंचों को गैरकानूनी, अश्लील, बाल यौन शोषण और बिना सहमति की अंतरंग तस्वीरों/वीडियो की पहचान के लिए स्वचालित टूल्स (Automated Tools) लगाने होंगे।
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सरकार ने बताया कि भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) और शिकायत अपीलीय समिति (GAC) के जरिए तंत्र को मजबूत किया गया है। साथ ही IIT जोधपुर, IIT मद्रास और IIT खड़गपुर में डीपफेक डिटेक्शन टूल विकसित किए जा रहे हैं।
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साइबर अपराध शिकायत पोर्टल:
cybercrime.gov.in -
राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर:
1930


