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छत्तीसगढ़ में केवल सरकारी शराब दुकानों से ही नहीं, बल्कि प्रदेश के बड़े होटलों, क्लबों और रेस्टोरेंट्स से भी सरकार के खजाने में भारी राजस्व आ रहा है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले चार वित्तीय वर्षों में इन व्यावसायिक संस्थानों से आबकारी विभाग को कुल 121.31 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ है। साझा किए गए दस्तावेजों के अनुसार, साल-दर-साल होटल और क्लबों में शराब परोसने से मिलने वाले राजस्व में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है, जो राज्य के शहरी क्षेत्रों में बढ़ते नाइटलाइफ़ और आउटडोर डाइनिंग कल्चर को दर्शाता है। वर्ष 2022-23 में जहाँ यह आय 36.06 करोड़ रुपये थी, वहीं वर्ष 2024-25 में यह बढ़कर 41.73 करोड़ रुपये तक पहुँच गई।
राजस्व के आंकड़ों का गहराई से विश्लेषण करने पर पता चलता है कि कमाई का सबसे बड़ा हिस्सा होटल लाइसेंस (एफ.एल. 3) और रेस्टोरेंट/क्लब (एफ.एल. 4-क) श्रेणियों से आता है। अकेले वर्ष 2024-25 में होटल लाइसेंस श्रेणी से सरकार को 32.68 करोड़ रुपये से अधिक की आय हुई, जबकि क्लबों और अन्य व्यावसायिक संस्थानों से भी हर साल करोड़ों रुपये का राजस्व खजाने में जमा हो रहा है। वर्तमान वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 12 जनवरी तक के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अब तक लगभग 6.82 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हो चुका है, जो आने वाले महीनों में और बढ़ने की उम्मीद है।
विशेष रूप से एफ.एल. 2 (क) और एफ.एल. 3 (ख) जैसी श्रेणियों में भी राजस्व का प्रवाह बना हुआ है, जो यह संकेत देता है कि प्रदेश के प्रीमियम डाइनिंग और व्यावसायिक आयोजनों में शराब परोसने का चलन स्थिर है। आबकारी विभाग के ये आंकड़े बताते हैं कि पर्यटन और शहरी सुविधाओं के विस्तार के साथ-साथ सरकार के लिए यह क्षेत्र भी राजस्व का एक विश्वसनीय स्रोत बनकर उभरा है। शहरी युवाओं और पर्यटकों के बीच बढ़ती क्लब संस्कृति ने इस राजस्व वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

