भूमिका देशभर में चिकित्सा अनुसंधान (Medical Research) के दायरे को व्यापक बनाने और नई दवाओं व इलाजों के परीक्षण को अधिक समावेशी बनाने के लिए इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब तक जटिल प्रशासनिक प्रक्रियाओं और अलग-अलग संस्थागत मंजूरियों के चलते छोटे और ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पताल बड़े अध्ययनों में शामिल नहीं हो पाते थे। इसी बाधा को दूर करने और क्लिनिकल ट्रायल्स में विविधता लाने के उद्देश्य से आईसीएमआर ने नई गाइडलाइंस जारी की हैं।
सिंगल एथिक्स रिव्यू व्यवस्था से आसान होगी मंजूरी प्रक्रिया आईसीएमआर के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, कई अस्पतालों और केंद्रों में एक साथ संचालित होने वाली मेडिकल स्टडीज के लिए ‘सिंगल एथिक्स रिव्यू’ प्रणाली लागू की गई है। इसका सीधा अर्थ यह है कि यदि कोई शोध 10 या 20 अलग-अलग अस्पतालों में एक साथ हो रहा है, तो प्रत्येक अस्पताल की एथिक्स कमेटी को स्वतंत्र रूप से पूरी रिसर्च की दोबारा जांच करने की आवश्यकता नहीं होगी। एक नामित व अधिकृत एथिक्स कमेटी द्वारा विस्तृत समीक्षा के बाद दी गई मंजूरी सभी संबद्ध केंद्रों के लिए मान्य होगी।
छोटे और ग्रामीण अस्पतालों को सीधा लाभ इस नीतिगत बदलाव का सर्वाधिक लाभ टियर-2, टियर-3 शहरों, ग्रामीण इलाकों और सीमित संसाधनों वाले छोटे रिसर्च केंद्रों को मिलेगा। जिन अस्पतालों के पास अपनी स्वयं की औपचारिक एथिक्स कमेटी नहीं है, वे भी अब देश के शीर्ष शोध संस्थानों के साथ मिलकर बड़े मेडिकल ट्रायल्स का हिस्सा बन सकेंगे। इससे प्रक्रिया में लगने वाले अनावश्यक समय और संसाधनों की भारी बचत होगी।
मरीजों की सुरक्षा और निगरानी के सख्त नियम बरकरार आईसीएमआर ने स्पष्ट किया है कि मंजूरी प्रक्रिया केंद्रीकृत होने के बावजूद मरीजों की सुरक्षा और क्लिनिकल मानकों में कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी। अध्ययन के दौरान मरीजों के स्वास्थ्य की निरंतर निगरानी, किसी भी गंभीर प्रतिकूल प्रभाव (Serious Adverse Events) की तत्काल रिपोर्टिंग और प्रोटोकॉल का अनुपालन सुनिश्चित करने का दायित्व संबंधित अस्पताल का ही रहेगा। यदि रिसर्च डिजाइन में कोई संशोधन होता है, तो उसकी सूचना भी तय मानकों के तहत देनी अनिवार्य होगी।
विविधतापूर्ण डेटा और बेहतर परिणाम इस पहल से मेडिकल रिसर्च में देश के सुदूर क्षेत्रों और विभिन्न भौगोलिक पृष्ठभूमियों के मरीजों की भागीदारी सुनिश्चित हो सकेगी। इससे किसी भी बीमारी, नई थेरेपी या दवा के प्रभाव का आकलन केवल बड़े महानगरों के मरीजों तक सीमित न रहकर अखिल भारतीय स्तर के वास्तविक डेटा पर आधारित होगा, जिससे भारतीय आबादी के अनुकूल अधिक सटीक और प्रभावी उपचार के रास्ते खुलेंगे।

