नई दिल्ली/रायपुर: देश में डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के 11 साल पूरे हो चुके हैं। इन 11 वर्षों में सरकारी कामकाज और सेवाओं को ऑनलाइन करने के साथ-साथ शिक्षा के क्षेत्र में भी एक बहुत बड़ा क्रांतिकारी बदलाव आया है। अब छात्रों को अपने स्कूल-कॉलेज की मार्कशीट, डिग्री या सर्टिफिकेट को कागज़ के रूप में सहेजकर रखने की मजबूरी से मुक्ति मिल रही है।

सरकार ने डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए देश के 110 करोड़ से अधिक शैक्षणिक रिकॉर्ड्स (एकेडमिक रिकॉर्ड) को पूरी तरह सुरक्षित और डिजिटल रूप दे दिया है। इससे छात्रों और अभिभावकों की सबसे बड़ी चिंता यानी ‘सर्टिफिकेट खोने या फटने का डर’ हमेशा के लिए खत्म हो गया है।

क्या हैं ये डिजिटल सुविधाएं और इनसे क्या होगा फायदा?

सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को आसान बनाने के लिए तीन मुख्य डिजिटल टूल्स तैयार किए हैं, जो आपस में जुड़े हुए हैं:

  • अपार आईडी (APAAR ID): यह हर छात्र की एक अनूठी डिजिटल पहचान (Unique Academic ID) है। इसके जरिए छात्र अपनी स्कूली शिक्षा, कॉलेज की पढ़ाई और स्किल डेवलपमेंट के सभी रिकॉर्ड एक ही जगह देख सकते हैं। देश में अब तक 26 करोड़ से ज्यादा छात्रों की अपार आईडी बनाई जा चुकी है।

  • एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (ABC): जैसे बैंक में पैसे जमा होते हैं, वैसे ही इस डिजिटल लॉकर में छात्रों की पढ़ाई के ‘क्रेडिट’ (अंक/स्कॉर्स) सुरक्षित रहते हैं। अगर कोई छात्र बीच में पढ़ाई छोड़ता है या दूसरा कॉलेज बदलता है, तो उसके पुराने अंक खराब नहीं होते और वे नए कॉलेज में ट्रांसफर हो जाते हैं। देश के लगभग 3,000 उच्च शिक्षण संस्थान इससे जुड़ चुके हैं।

  • नेशनल एकेडमिक डिपॉजिटरी (NAD): यह एक ऑनलाइन तिजोरी है, जहां स्कूल और यूनिवर्सिटी सीधे छात्रों की असली डिग्री, डिप्लोमा और मार्कशीट डिजिटल रूप में अपलोड करते हैं। इसे कहीं भी और कभी भी मोबाइल के जरिए देखा और जांचा जा सकता है।

छात्रों को मिलने वाले 5 बड़े लाभ:

  1. कागजी झंझट से मुक्ति: एडमिशन, स्कॉलरशिप या नौकरी के आवेदन के समय अब बार-बार फोटोकॉपी कराने और भारी-भरकम फाइलें लेकर घूमने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

  2. तुरंत वेरिफिकेशन: कंपनियां या कॉलेज सीधे डिजिटल माध्यम से दस्तावेजों की जांच कर सकेंगे, जिससे इंसानी दखल कम होगा और धोखाधड़ी या फर्जी सर्टिफिकेट का खेल पूरी तरह खत्म हो जाएगा।

  3. पढ़ाई बदलने में आसानी: नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत छात्र बिना किसी परेशानी के एक कॉलेज से दूसरे कॉलेज में अपनी पढ़ाई और क्रेडिट ट्रांसफर कर सकेंगे।

  4. हर जगह पहुंच: डिजीलॉकर से जुड़े होने के कारण छात्र अपने सर्टिफिकेट्स को दुनिया के किसी भी कोने से ऑनलाइन डाउनलोड कर सकते हैं।

  5. पारदर्शिता: प्रतियोगी परीक्षाओं (Competitive Exams) के फॉर्म भरते समय दस्तावेजों का डिजिटल वेरिफिकेशन होने से पूरी प्रक्रिया साफ-सुथरी और तेज हो जाएगी।

 छात्रों ने साझा किया अपना अनुभव

इस डिजिटल व्यवस्था का लाभ उठा रहे छत्तीसगढ़ के छात्रों ने इसे बेहद मददगार बताया है:

“अपार आईडी की वजह से अब वेरिफिकेशन का काम बहुत आसान हो गया है और कागजी भागदौड़ कम हुई है। सेमिनार, कॉम्पिटिशन, इंटर्नशिप और स्कॉलरशिप के लिए अप्लाई करना अब काफी सुविधाजनक हो गया है, जिससे समय और मेहनत दोनों बचती हैं।”अंजलि राठौर, एमबीए छात्रा (रुंगटा इंटरनेशनल स्किल्स यूनिवर्सिटी, भिलाई)

“मेरी मार्कशीट और सर्टिफिकेट अब डिजिटल रूप से पूरी तरह सुरक्षित हैं। अपार आईडी की वजह से भविष्य में दूसरे कॉलेज में एडमिशन लेना या स्कॉलरशिप का वेरिफिकेशन कराना बहुत आसान हो गया है। इसने पढ़ाई के पूरे सिस्टम को स्मार्ट और पेपरलेस बना दिया है।”आशिष तिवारी, छात्र (शासकीय वी. वाई. टी. स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय, दुर्ग)

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