रायपुर। छत्तीसगढ़ में आकाशीय बिजली (गाज) गिरने की घटनाओं ने प्रदेश में भारी जनहानि पहुंचाई है।
आधिकारिक आंकड़ों के विश्लेषण से यह भयावह तस्वीर सामने आई है कि राज्य के विभिन्न जिलों में अब तक कुल 434 लोगों की अकाल मृत्यु हो चुकी है। इस प्राकृतिक आपदा के बीच राज्य शासन ने संवेदनशीलता दिखाते हुए प्रभावित परिवारों की आर्थिक मदद की है।
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अब तक कुल 17 करोड़ 28 लाख रुपये की सहायता राशि वितरित की जा चुकी है, जिसमें प्रत्येक मृतक के परिवार को औसतन 4 लाख रुपये प्रदान किए जा रहे हैं।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि सरगुजा संभाग का बलरामपुर जिला बिजली गिरने से सबसे अधिक प्रभावित रहा है। यहाँ अकेले 51 लोगों की जान गई है, जिसके एवज में शासन ने 2.04 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया है।
इसके बाद सरगुजा जिले में 37 मौतें दर्ज की गई हैं जहाँ 1.48 करोड़ रुपये वितरित किए गए हैं। कोरबा, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही एवं जशपुर जिलों में भी स्थिति गंभीर रही है, जहाँ प्रत्येक जिले में 26-26 लोगों की मृत्यु हुई है और प्रत्येक जिले को 1.04 करोड़ रुपये की सहायता राशि दी गई है।
वहीं अन्य जिलों की बात करें तो कोरिया जिले में 22 मौतों पर 88 लाख रुपये, जबकि बलोदाबाजार और जांजगीर-चांपा में 18-18 मौतों पर 72-72 लाख रुपये की सहायता दी गई है। राजधानी रायपुर में 9 लोगों की जान गई है और वहां 36 लाख रुपये का वितरण किया गया है। पूरे प्रदेश में नारायणपुर जिला सबसे कम प्रभावित रहा है, जहाँ केवल 1 मृत्यु दर्ज की गई है और शासन ने वहां 4 लाख रुपये की सहायता पहुँचाई है।
आंकड़ों का सूक्ष्म विश्लेषण करने पर यह स्पष्ट होता है कि छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल और पहाड़ी क्षेत्रों, विशेषकर सरगुजा और बस्तर संभागों में सबसे अधिक जनहानि हुई है।
अकेले सरगुजा संभाग में पूरे प्रदेश की कुल मौतों का लगभग 37 प्रतिशत हिस्सा दर्ज किया गया है। इस संभाग में सूरजपुर जिले में 16 मौतों पर 64 लाख और मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में 9 मौतों पर 32 लाख रुपये बांटे गए हैं। कुल मिलाकर सरगुजा संभाग के जिलों में 161 लोगों की जान गई है और 6.40 करोड़ रुपये की राहत दी गई है।
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आधिकारिक विवरण के अनुसार, अकेले बलरामपुर जिले में 51 लोगों की असामयिक मृत्यु हुई है। इस अपूरणीय क्षति की भरपाई के लिए राज्य शासन ने तत्परता दिखाते हुए प्रभावित परिवारों को 2 करोड़ 4 लाख रुपये की कुल सहायता राशि वितरित की है। बलरामपुर की भौगोलिक स्थिति और पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण यहाँ बिजली गिरने की घटनाएं प्रदेश में सबसे ज्यादा दर्ज की गई हैं।
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इसी क्रम में जशपुर जिले की स्थिति भी अत्यंत चिंताजनक बनी हुई है। जशपुर जिले में आकाशीय बिजली की चपेट में आने से कुल 26 लोगों की जान गई है। शासन द्वारा इन मृतकों के परिजनों को संबल प्रदान करने के लिए 1 करोड़ 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि प्रदान की गई है। जशपुर और बलरामपुर दोनों ही जिले सरगुजा संभाग के अंतर्गत आते हैं, जो वर्तमान में इस प्राकृतिक आपदा से प्रदेश का सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र बना हुआ है।
बस्तर संभाग के सुदूर वनांचल में भी बिजली गिरने की घटनाओं ने गहरा घाव दिया है। यहाँ बस्तर जिले में 13 लोगों की मृत्यु पर 48 लाख, कांकेर और कोंडागांव में 11-11 मौतों पर 44-44 लाख, दंतेवाड़ा में 10 मौतों पर 40 लाख, सुकमा में 7 मौतों पर 28 लाख और बीजापुर में 5 मौतों पर 20 लाख रुपये की सहायता प्रदान की गई है। इन दोनों संभागों को मिलाकर कुल 219 लोगों की मृत्यु हुई है, जो प्रदेश के कुल आंकड़ों का लगभग आधा हिस्सा है।
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विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों और खेतों में काम करने वाले लोग इस आपदा का शिकार अधिक होते हैं। प्रशासन ने नागरिकों से बार-बार अपील की है कि खराब मौसम के दौरान ऊंचे पेड़ों के नीचे शरण न लें और बिजली कड़कने पर तुरंत सुरक्षित पक्के मकानों में चले जाएं। बिलासपुर जैसे कुछ जिलों में मुआवजा राशि और मौतों की संख्या में थोड़ा अंतर प्रक्रियात्मक सत्यापन के कारण हो सकता है, लेकिन शासन राहत वितरण में पूरी तत्परता बरत रहा है।
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