ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के प्रभावी क्रियान्वयन में पंचायतों की भूमिका को अधिनियम की धारा 13 के तहत बेहद स्पष्ट और सशक्त बनाया गया है। इसके अंतर्गत जिला स्तर पर पंचायतें ब्लॉक-वार परियोजनाओं को अंतिम रूप देने और उनकी निगरानी का कार्य करती हैं, जबकि मध्यवर्ती यानी ब्लॉक स्तर पर पंचायतें योजनाओं के अनुमोदन और पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी संभालती हैं। इस पूरी प्रक्रिया में जिला कार्यक्रम समन्वयक पंचायतों को उनके कार्यों के निर्वहन में तकनीकी और प्रशासनिक सहायता प्रदान करते हैं, जिससे ओडिशा सहित पूरे देश में योजना का सुचारू संचालन सुनिश्चित होता है।
पंचायती राज व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने के लिए सरकार डिजिटल इंडिया पहल के तहत ई-गवर्नेंस पर विशेष जोर दे रही है। इसके लिए ई-ग्रामस्वराज जैसे आधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किए गए हैं, जो पंचायतों को योजना बनाने, बजट तैयार करने और ऑनलाइन भुगतान करने की सुविधा देते हैं। पीएफएमएस (PFMS) और सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) के साथ इन एप्लिकेशनों के एकीकरण से न केवल विक्रेताओं को वास्तविक समय में भुगतान संभव हुआ है, बल्कि खरीद प्रक्रिया में भी पारदर्शिता आई है। इसके अलावा, ‘मेरी पंचायत’ और ‘ऑडिटऑनलाइन’ जैसे ऐप के जरिए ग्रामीण विकास के कार्यों की जानकारी अब जनता के लिए सीधे सुलभ है।
महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी ऐतिहासिक कदम उठाए गए हैं। संविधान के अनुच्छेद 243घ के तहत एक-तिहाई आरक्षण के प्रावधान के मुकाबले, अब देश के 21 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों ने पंचायतों में महिलाओं के लिए 50% आरक्षण लागू कर दिया है। मंत्रालय ने इन निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों (WER) के नेतृत्व कौशल को निखारने के लिए व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए हैं। वर्ष 2024 से 2026 के बीच अब तक देश भर में 10.80 लाख से अधिक महिला प्रतिनिधियों को प्रशिक्षित किया जा चुका है, जिनमें अकेले ओडिशा की 63,000 महिलाएं शामिल हैं। ये प्रशिक्षित महिलाएं अब ग्राम सभाओं में सक्रिय भागीदारी निभाते हुए कन्या भ्रूण हत्या और बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ भी मोर्चा संभाल रही हैं।
अंततः, इन सुधारों का परिणाम यह हुआ है कि पंचायतें अब सहभागी और आवश्यकता-आधारित विकास योजनाएं तैयार कर रही हैं। केंद्रीय और राज्य वित्त आयोगों से प्राप्त धनराशि के बेहतर उपयोग और विभिन्न योजनाओं के तालमेल से ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी कम करने और आजीविका के अवसर पैदा करने में बड़ी सफलता मिल रही है। ‘पंचायत उन्नति सूचकांक’ (PAI) के आंकड़े गवाही देते हैं कि ओडिशा और देश के अन्य राज्यों की पंचायतें अब ग्रामीण शासन को अधिक कुशल, जवाबदेह और समावेशी बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं।

