सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने अनुसूचित जाति के व्यक्तियों के आर्थिक उत्थान और शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए एक व्यापक रणनीति तैयार की है। राज्यसभा में इस संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री श्री रामदास अठावले ने बताया कि राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त और विकास निगम (NSFDC) के माध्यम से उन परिवारों के लिए स्वरोजगार और आय सृजन की योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनकी वार्षिक आय ₹5 लाख तक है। मंत्रालय का मुख्य उद्देश्य इन ऋण योजनाओं के जरिए अनुसूचित जाति के लाभार्थियों के बीच उद्यमिता, उच्च शिक्षा और आत्मनिर्भर आजीविका को प्रभावी ढंग से बढ़ावा देना है।
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इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए एनएसएफडीसी ने अपनी योजनाओं को और अधिक व्यावहारिक और मांग-आधारित बनाया है। संसदीय स्थायी समितियों और विभिन्न परामर्श समितियों से मिले सुझावों के आधार पर योजनाओं की समीक्षा की गई है, जिसके तहत कई पुरानी योजनाओं का विलय या पुनर्निर्धारण किया गया है ताकि लक्षित समूहों तक लाभ आसानी से पहुँच सके। उदाहरण के तौर पर, अब ‘सावधि ऋण योजना’ के तहत ₹50 लाख तक की परियोजना लागत वाली यूनिट्स के लिए अधिकतम ₹45 लाख तक की ऋण सीमा तय की गई है, जो छोटे और मध्यम स्तर के व्यवसाय शुरू करने वाले युवाओं के लिए एक बड़ा संबल साबित हो रही है।
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शिक्षा के क्षेत्र में मंत्रालय ने एक क्रांतिकारी बदलाव किया है, जिससे अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए वैश्विक स्तर पर अवसरों के द्वार खुल गए हैं। पिछले पांच वर्षों के दौरान बढ़ती जरूरतों को देखते हुए शैक्षिक ऋण की अधिकतम सीमा को देश-विदेश में पढ़ाई के लिए ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹40 लाख कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त, सूक्ष्म वित्त, आजीविका सूक्ष्म वित्त और उद्यम निधि जैसी योजनाओं के माध्यम से बेहद रियायती ब्याज दरों पर वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। ये सभी प्रयास न केवल अनुसूचित जाति के युवाओं की शैक्षणिक नींव मजबूत कर रहे हैं, बल्कि उन्हें व्यावसायिक रूप से सक्षम बनाकर समाज की मुख्यधारा में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए भी तैयार कर रहे हैं।

