रेलवन’ ऐप का बढ़ता दायरा
भारतीय रेलवे द्वारा 1 जुलाई 2025 को लॉन्च किए गए ‘रेलवन’ (RailOne) ऐप ने डिजिटल टिकटिंग के क्षेत्र में नया रिकॉर्ड बनाया है। 2 अगस्त 2026 तक इस ऐप को 4.76 करोड़ से अधिक बार डाउनलोड किया जा चुका है। वर्तमान में इस ऐप के ज़रिए प्रतिदिन औसतन 10 लाख टिकट बुक किए जा रहे हैं, जिनमें लगभग 2.79 लाख आरक्षित और 7.24 लाख अनारक्षित टिकट शामिल हैं।
एक ही प्लेटफॉर्म पर सभी रेलवे सेवाएं
‘रेलवन’ ऐप यात्रियों को सिंगल-साइन-ऑन (SSO) सुविधा प्रदान करता है, जिससे उन्हें अलग-अलग काम के लिए अलग-अलग ऐप डाउनलोड करने या पासवर्ड याद रखने की आवश्यकता नहीं पड़ती। इस एक ही प्लेटफॉर्म पर आरक्षित, अनारक्षित और प्लेटफॉर्म टिकट बुकिंग के साथ-साथ पीएनआर (PNR) स्टेटस, ट्रेन शेड्यूल, यात्रा योजना और ‘रेल मदद’ जैसी तमाम सार्वजनिक सेवाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
एनटीईएस से कतारों और समय की बचत
वर्ष 2000 में शुरू हुई राष्ट्रीय रेल पूछताछ प्रणाली (NTES) यात्रियों को ट्रेनों की लाइव स्थिति और समय-सारणी की सटीक जानकारी देती है। 1 अगस्त 2026 तक एनटीईएस ऐप के एंड्रॉइड पर 4.5 करोड़ से अधिक और आईओएस (iOS) पर 16 लाख से अधिक डाउनलोड हो चुके हैं। वर्तमान में यह सिस्टम प्रतिदिन 6 करोड़ से अधिक पूछताछ और 80,000 सक्रिय उपयोगकर्ताओं को संभाल रहा है, जिससे रेलवे स्टेशनों के पूछताछ काउंटरों पर लगने वाली लंबी कतारें खत्म हो रही हैं।
डिजिटल टिकटिंग और ऑटोमैटिक रिफंड
रेलवे में डिजिटल सेवाओं का उपयोग तेजी से बढ़ा है। वर्तमान में कुल आरक्षित टिकटों में से लगभग 89 प्रतिशत ऑनलाइन बुक हो रहे हैं, जो वर्ष 2013-14 में केवल 49 प्रतिशत थे। साथ ही, काउंटर से बाहर अन्य डिजिटल माध्यमों से बुक होने वाले अनारक्षित टिकटों की संख्या भी बढ़कर 39 प्रतिशत हो गई है। इसके अलावा, ऑनलाइन ई-टिकट (NGET) के माध्यम से बुकिंग करने वाले यात्रियों को ट्रेन रद्द होने की स्थिति में बिना किसी परेशानी के सीधे बैंक खाते में स्वचालित (ऑटोमैटिक) रिफंड मिल जाता है।


