सिरपुर महोत्सव 2026: महानदी के तट पर सजेगी अध्यात्म और कला की त्रिवेणी, 1 फरवरी से होगा भव्य आगाज़
छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान का प्रतीक राजिम कुंभ कल्प 2026 इस वर्ष 1 फरवरी से 15 फरवरी 2026 तक भव्य रूप में आयोजित किया जाएगा। त्रिवेणी संगम के पावन तट पर लगने वाला यह कल्प मेला न केवल एक धार्मिक आयोजन है, बल्कि राज्य की लोकसंस्कृति, परंपरा और आस्था का विराट उत्सव भी है, जिसमें हर वर्ष लाखों श्रद्धालु देश-विदेश से शामिल होते हैं।
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राजिम कुंभ कल्प की परंपरा कुंभ मेले से प्रेरित मानी जाती है। माघ पूर्णिमा के दौरान संगम में स्नान का विशेष महत्व है, जिसे पुण्यदायी माना जाता है। आयोजन के दौरान साधु-संतों के प्रवचन, धार्मिक अनुष्ठान, यज्ञ-हवन और पूजा-पाठ के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी श्रृंखला आयोजित की जाएगी। छत्तीसगढ़ की लोकनृत्य, लोकगीत, नाट्य प्रस्तुतियां और पारंपरिक उत्सव इस मेले को विशिष्ट पहचान देते हैं।
पर्यटन और सांस्कृतिक पहचान को मिलेगा नया आयाम
राजिम कुंभ कल्प 2026 को राज्य सरकार पर्यटन के बड़े अवसर के रूप में देख रही है। इस आयोजन के माध्यम से छत्तीसगढ़ की धार्मिक परंपराओं, सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक सौंदर्य को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत किया जाएगा। सरकार का मानना है कि यह महापर्व न केवल धार्मिक आस्था को सुदृढ़ करेगा, बल्कि स्थानीय व्यापार, हस्तशिल्प, होटल व्यवसाय और परिवहन क्षेत्र को भी नई गति देगा।
प्रशासनिक तैयारियां तेज
राज्य सरकार और गरियाबंद जिला प्रशासन द्वारा आयोजन की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। स्वच्छता अभियान, यातायात प्रबंधन, स्वास्थ्य सेवाएं, पेयजल व्यवस्था और सुरक्षा को लेकर विशेष योजनाएं बनाई जा रही हैं। मेले को सुचारु और सुरक्षित बनाने के लिए स्थानीय स्तर पर समितियां गठित कर दी गई हैं। साथ ही डिजिटल प्रचार और सूचना तंत्र को भी मजबूत किया जा रहा है, ताकि श्रद्धालुओं और पर्यटकों को समय पर आवश्यक जानकारी मिल सके।
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आस्था के साथ विकास का महापर्व
राजिम कुंभ कल्प केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक एकता और आर्थिक उन्नति का प्रतीक भी है। यह आयोजन परंपरा और आधुनिक व्यवस्था के समन्वय का उदाहरण बनता जा रहा है। वर्ष 2026 का राजिम कुंभ कल्प राज्य के लिए एक ऐसा अवसर होगा, जो छत्तीसगढ़ को धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर और अधिक मजबूती से स्थापित करेगा।
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