वर्ष 2026 की चैत्र रामनवमी केवल एक तिथि नहीं, बल्कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था का एक दिव्य उत्सव बनकर आ रही है। इस बार 26 मार्च 2026, गुरुवार के दिन पूरा देश ‘राममय’ नज़र आएगा। विशेष बात यह है कि इस वर्ष रामनवमी का संयोग गुरुवार के साथ बन रहा है, जिसे शास्त्रों में भगवान विष्णु और श्री राम की उपासना के लिए अत्यंत मंगलकारी और ‘सिद्धि योग’ प्रदाता माना गया है। जैसे-जैसे चैत्र नवरात्रि अपनी पूर्णता की ओर बढ़ेगी, नवमी की सुबह मंदिरों में घंटों-घड़ियालों की गूंज और “जय श्री राम” के उद्घोष के साथ एक नई ऊर्जा का संचार होगा।
इस पर्व का सबसे मुख्य केंद्र एक बार फिर अयोध्या की पावन नगरी होगी, जहाँ रामलला के भव्य मंदिर में जन्मोत्सव की अभूतपूर्व तैयारियां की जा रही हैं। दोपहर के 11:05 से 01:38 के बीच, जब सूर्य अपने शिखर पर होगा, तब भगवान का प्रतीकात्मक जन्म कराया जाएगा। अयोध्या में इस बार भी ‘सूर्य तिलक’ के उस अद्भुत नजारे को देखने के लिए लाखों श्रद्धालु जुटेंगे, जिसमें सूर्य की किरणें सीधे प्रभु के मस्तक को सुशोभित करेंगी। यह तकनीक और आस्था का एक ऐसा मिलन है जो हर भक्त को रोमांचित कर देता है।
घरों में इस दिन की शुरुआत पवित्र स्नान और व्रत के संकल्प के साथ होगी, जहाँ दोपहर 12 बजे के करीब ‘भए प्रकट कृपाला’ के जयकारों के साथ पालने में झूलते रामलला की पूजा की जाएगी। पूजा की थाली में सजी धनिया पंजीरी, पंचामृत और केसरिया भात का भोग न केवल श्रद्धा का प्रतीक है, बल्कि यह उत्सव की मिठास को भी बढ़ा देता है। साथ ही, कन्या पूजन के माध्यम से देवी स्वरूपा कन्याओं का सत्कार कर लोग नवरात्रि की साधना को पूर्ण करेंगे।
रामनवमी का यह पर्व हमें केवल उत्सव मनाने का अवसर ही नहीं देता, बल्कि मर्यादा पुरुषोत्तम के उन आदर्शों—सत्य, त्याग और संयम—को भी याद दिलाता है, जिनकी आज के युग में सबसे अधिक आवश्यकता है। चाहे वह रामायण का पाठ हो या सुंदरकांड की चौपाइयां, हर स्वर इस दिन यही संदेश देगा कि अधर्म पर धर्म की जीत सदैव निश्चित है। 26 मार्च की शाम जब देश भर के मंदिरों और घरों में दीप जलेंगे, तब वह रोशनी केवल अंधकार को ही नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर की बुराइयों को भी खत्म करने का संकल्प दोहराएगी।


