रायपुर। छत्तीसगढ़ में सड़क सुरक्षा की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है, जहाँ पिछले 13 महीनों के भीतर हजारों परिवारों ने अपने अपनों को खोया है। राज्य सरकार द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 1 जनवरी 2025 से 11 फरवरी 2026 के बीच प्रदेश भर में कुल 17,643 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गई हैं। इन हादसों की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस अवधि में कुल 4,250 लोगों की मृत्यु हुई है, जिनमें से 4,189 लोगों ने दुर्घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया, जबकि 61 लोगों की जान अस्पताल में इलाज के दौरान गई। इसके अलावा, 3,012 लोग इन हादसों में गंभीर रूप से घायल होकर अस्पतालों में भर्ती हुए हैं।

राजधानी रायपुर इस सूची में सबसे ऊपर है, जहाँ सर्वाधिक 2,368 सड़क हादसे हुए और कुल 426 लोगों की जान गई। रायपुर के बाद बिलासपुर और दुर्ग जैसे बड़े शहर दुर्घटनाओं के मुख्य केंद्र बनकर उभरे हैं। बिलासपुर में 1,711 और दुर्ग में 1,540 सड़क हादसे दर्ज किए गए हैं, जो शहरी इलाकों में यातायात प्रबंधन और तेज रफ्तार पर नियंत्रण की बड़ी चुनौती को दर्शाते हैं। औद्योगिक क्षेत्र कोरबा और रायगढ़ में भी हादसों की संख्या काफी अधिक रही है, जहाँ क्रमशः 259 और 238 लोगों की मौत हुई है।

सरगुजा संभाग और जशपुर जिले के आंकड़े भी बेहद डरावने हैं। सरगुजा संभाग के प्रमुख केंद्र अंबिकापुर (सरगुजा) में 788 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 177 लोगों की असामयिक मृत्यु हुई और 126 लोग गंभीर रूप से घायल हुए। वहीं जशपुर जिले की स्थिति चिकित्सा सुविधाओं के अभाव और सड़क सुरक्षा के लिहाज से गंभीर नजर आती है, जहाँ 311 सड़क हादसों में 128 लोगों की जान चली गई। जशपुर में ध्यान देने वाली बात यह है कि यहाँ इलाज के दौरान होने वाली मौतों की संख्या 19 है, जो अन्य बड़े जिलों की तुलना में काफी ज्यादा है। यह आंकड़ा स्पष्ट करता है कि उत्तरी छत्तीसगढ़ के इन पहाड़ी और घुमावदार रास्तों वाले क्षेत्रों में दुर्घटना के बाद मिलने वाली तत्काल स्वास्थ्य सेवा में सुधार की भारी गुंजाइश है।
बस्तर संभाग और आदिवासी बहुल जिलों की स्थिति भी कम गंभीर नहीं है। जगदलपुर (बस्तर) में हालांकि हादसों की संख्या रायपुर के मुकाबले कम है, लेकिन यहाँ गंभीर रूप से घायलों की संख्या 324 तक पहुँच गई है। इसी तरह सुकमा जैसे जिलों में इलाज के दौरान होने वाली मौतों के आंकड़े बताते हैं कि दुर्गम क्षेत्रों में त्वरित चिकित्सा सहायता पहुँचाना अभी भी एक बड़ी बाधा है। सुकमा में 110 हादसों में 22 लोगों की मौत इलाज के दौरान हुई, जो राज्य के औसत से कहीं ज्यादा है।

समग्र रूप से ये आंकड़े प्रदेश की सड़कों पर असुरक्षा की एक डरावनी तस्वीर पेश करते हैं औसतन हर महीने राज्य में 1,300 से अधिक हादसे हो रहे हैं, जो यातायात नियमों के उल्लंघन, सड़कों की खराब स्थिति और ब्लैक स्पॉट्स की अनसुलझी समस्याओं की ओर इशारा करते हैं। प्रशासन के लिए अब चुनौती केवल नियम बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि सड़कों पर होने वाले इस ‘मौन युद्ध’ को रोकने के लिए ठोस धरातलीय कार्रवाई करने की है।

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