रायपुर:

छत्तीसगढ़ में सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) के तहत पिछले दो वित्तीय वर्षों (2024-25 और 2025-26) के तुलनात्मक आंकड़े सामने आए हैं. इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि प्रदेश के नागरिकों में सूचना के अधिकार को लेकर जागरूकता लगातार बढ़ रही है. जहाँ वर्ष 2024-25 में राज्य के सभी विभागों को मिलाकर कुल 69,463 आवेदन मिले थे, वहीं वर्ष 2025-26 में यह संख्या भारी बढ़ोतरी के साथ 84,935 तक पहुँच गई.

वित्तीय वर्ष 2024-25 में प्राप्त 69,463 आवेदनों में से 18,951 का निराकरण हुआ और 1,458 आवेदन तकनीकी या नियमानुसार अस्वीकृत किए गए, जिससे कुल 20,409 आवेदनों पर कार्रवाई पूरी हुई. इसके बाद भी इस वर्ष के 49,054 आवेदन लंबित रह गए. वहीं दूसरी ओर, वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्राप्त 84,935 आवेदनों में से 30,538 का निराकरण हुआ और 2,772 आवेदन अस्वीकृत किए गए, जिससे कुल 33,310 आवेदनों का निपटारा हुआ. इस वर्ष आवेदनों की संख्या बढ़ने के कारण लंबित मामलों का आंकड़ा भी बढ़कर 51,625 हो गया.

दोनों ही वर्षों में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग (B022) सूचना मांगने के मामले में शीर्ष स्थान पर बना रहा, हालांकि पिछले वर्ष के मुकाबले इस साल इस विभाग में आवेदनों में थोड़ी गिरावट दर्ज की गई है. वर्ष 2024-25 में जहाँ इस अकेले विभाग में रिकॉर्ड 50,754 आवेदन आए थे और 39,614 मामले लंबित रहे थे, वहीं वर्ष 2025-26 में आवेदनों की संख्या घटकर 42,013 रह गई, जिसमें से 13,099 का निराकरण व 1,351 को निरस्त करने के बाद 27,563 मामले लंबित सूची में दर्ज हैं.

वर्ष 2025-26 की रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाला बदलाव वन विभाग में देखने को मिला है, जो शीर्ष 5 की सूची में सीधे दूसरे स्थान पर आ गया है. वन विभाग में वर्ष 2024-25 में जहाँ महज 1,223 आवेदन आए थे और 726 मामले लंबित थे, वहीं 2025-26 में यह ग्राफ भारी उछाल के साथ 6,731 आवेदनों पर पहुँच गया, जिसमें से 4,192 मामले फिलहाल पेंडिंग हैं. इसी तरह खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग भी वर्ष 2025-26 में 3,582 आवेदनों (3,276 लंबित) के साथ शीर्ष 5 में शामिल हो गया है. इसके अलावा सामान्य प्रशासन विभाग में भी आवेदनों की संख्या एक साल में 2,321 (346 लंबित) से बढ़कर 4,463 (1,151 लंबित) हो गई है.

कार्य की रफ्तार के मामले में मुख्यमंत्री सचिवालय (B046) दोनों साल अव्वल रहा है. वर्ष 2024-25 में आए 39 आवेदनों में से 35 का निराकरण कर दिया गया था और सिर्फ 2 पेंडिंग बचे थे. वहीं, 2025-26 में काम का बोझ दोगुना से अधिक होने के बाद भी सचिवालय में आए 84 आवेदनों में से 83 का निपटारा कर दिया गया और वर्तमान में यहाँ सिर्फ 1 आवेदन ही लंबित है. दूसरी तरफ, संस्कृति विभाग (B029) में भी इस साल थोड़ा सुधार दिखा है, जहाँ वर्ष 2024-25 में जागरूकता की कमी से एक भी आवेदन नहीं आया था और रिपोर्ट पूरी तरह शून्य थी, वहीं 2025-26 में कुल 39 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 15 का निराकरण हुआ और 23 आवेदन अभी लंबित हैं.

अन्य विभागों की बात करें तो गृह विभाग में आवेदनों की संख्या एक साल में 781 (412 लंबित) से बढ़कर 1,992 हो गई है, जिसमें से अब 1,074 मामले पेंडिंग हैं. वहीं राजस्व विभाग में भी आवेदनों का ग्राफ 1,524 (721 लंबित) से बढ़कर 2,829 पर पहुँच गया है, जहाँ 1,498 मामले अभी लंबित सूची में बने हुए हैं. इन आंकड़ों से साफ है कि जहाँ एक तरफ लोगों का भरोसा ऑनलाइन आरटीआई पर बढ़ा है, वहीं विभागों पर लंबित मामलों को जल्द निपटाने का दबाव भी बढ़ गया है.

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