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रायपुर:
भगवान शिव की भक्ति और उपासना को समर्पित सावन का पवित्र महीना इस साल 30 जुलाई 2026 से शुरू होने जा रहा है। इस पूरे महीने देश-विदेश में शिव भक्त सोमवार व्रत, कांवड़ यात्रा, जलाभिषेक और मंगला गौरी व्रत जैसे धार्मिक अनुष्ठानों में लीन रहेंगे। हिंदू पंचांग के अनुसार, सावन महीने की शुरुआत पूर्णिमा के अगले दिन यानी कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से होती है और अगली पूर्णिमा के दिन इसका समापन होता है। इस साल सावन का यह पावन महीना 30 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त को रक्षाबंधन के त्योहार के दिन समाप्त होगा। धार्मिक आस्था के साथ-साथ यह महीना संयम, सात्विक जीवनशैली और पॉजिटिव सोच अपनाने का एक बहुत बड़ा संदेश देता है।
सावन के दौरान देश के करोड़ों हिंदू घरों में प्याज, लहसुन, शराब और तली-भुनी चीजों से पूरी तरह दूरी बना ली जाती है और पूरी तरह सात्विक व शाकाहारी भोजन (Vegetarian Food) किया जाता है। सदियों से चली आ रही इस परंपरा के पीछे केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि मानसून से जुड़े कुछ बेहद ठोस वैज्ञानिक कारण (Scientific Reasons) भी हैं। दरअसल, सावन का महीना भारी मानसून के बीच आता है, जिस वजह से एटमॉस्फियर (वातावरण) में नमी काफी बढ़ जाती है। इस हाई ह्यूमिडिटी के कारण इंसानी शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है और हमारी पाचन शक्ति (Digestion) कमजोर पड़ जाती है। ऐसे में प्याज, लहसुन और ज्यादा तेल वाला हैवी खाना पचाने में दिक्कत होती है, जबकि हल्का और कम तेल में बना सात्विक भोजन आसानी से पच जाता है और बॉडी को फुल एनर्जी देता है। यही वजह है कि इस मौसम में सात्विक डाइट को सबसे बेस्ट माना गया है।
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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन के इस पावन महीने में दान-पुण्य करने का एक विशेष और बड़ा महत्व होता है। इस दौरान जरूरतमंद लोगों की सहायता करने के साथ-साथ दूध और अन्य डेयरी प्रोडक्ट्स का दान करना बेहद शुभ और पुण्यदायी माना जाता है। इस पूरे महीने में ‘सावन सोमवार’ का क्रेज सबसे ज्यादा होता है क्योंकि सोमवार का दिन सीधे भोलेनाथ को समर्पित है। इस साल सावन के महीने में कुल चार सोमवार पड़ेंगे, जिसमें पहला सावन सोमवार 3 अगस्त को, दूसरा 10 अगस्त को, तीसरा 17 अगस्त को और चौथा व अंतिम सावन सोमवार 24 अगस्त को होगा। मान्यता है कि सोमवार का व्रत रखने से वैवाहिक जीवन में खुशहाली आती है और अविवाहित लड़कियों को मनचाहा जीवनसाथी मिलता है।
सोमवार के साथ-साथ सावन में माता पार्वती को समर्पित ‘मंगला गौरी व्रत’ का भी बड़ा महत्व है, जिसे विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, वैवाहिक सुख और परिवार की खुशहाली के लिए सावन के हर मंगलवार को रखती हैं। इस साल पहला मंगला गौरी व्रत 4 अगस्त को रखा जाएगा, जिसके बाद 11 अगस्त को दूसरा, 18 अगस्त को तीसरा और 25 अगस्त को चौथा व अंतिम व्रत होगा। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि धार्मिक परंपराओं का पालन करना व्यक्तिगत आस्था का विषय है, लेकिन अगर आप किसी बीमारी या हेल्थ प्रॉब्लम से जूझ रहे हैं, तो व्रत रखने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।


