सेवा सुरक्षा के आश्वासन पर अब तक आदेश नहीं, विभागीय TET की प्रक्रिया जल्द शुरू करने की मांग; मंच ने कहा—आश्वासन का समय पूरा, अब चाहिए ठोस निर्णय
रायपुर। छत्तीसगढ़ में सेवारत शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता और उससे जुड़ी सेवा सुरक्षा का मुद्दा एक बार फिर गरमाने लगा है। लंबे समय से इस मामले के समाधान के लिए शासन और विभागीय अधिकारियों से संवाद कर रहा शिक्षक साझा मंच अब मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री से पुनः मुलाकात की तैयारी में है।
शिक्षक साझा मंच का कहना है कि पूर्व में मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से हुई मुलाकात के दौरान प्रभावित शिक्षकों की सेवा सुरक्षा को लेकर सकारात्मक आश्वासन मिला था। इसी भरोसे पर मंच ने अपने प्रस्तावित आंदोलन को स्थगित किया था। लेकिन समय बीतने के बावजूद विभागीय स्तर पर स्पष्ट आदेश अथवा विभागीय TET की प्रक्रिया सामने नहीं आने से प्रदेशभर के शिक्षकों में फिर असमंजस की स्थिति बनने लगी है।
मंच के अनुसार, 15 जुलाई को रायपुर के बूढ़ातालाब मैदान में सेवा सुरक्षा सहित शिक्षक हितों से जुड़े मुद्दों को लेकर एकदिवसीय आंदोलन किया गया था।
पहले भी 146 विकासखंडों में उठ चुकी है आवाज
TET की अनिवार्यता, सेवा सुरक्षा और वरिष्ठता के मुद्दे को लेकर शिक्षक साझा मंच ने अगस्त में प्रदेश के 146 विकासखंडों में रैली, धरना और ज्ञापन कार्यक्रम आयोजित किया था। मंच ने उस दौरान स्कूलों की पढ़ाई बाधित किए बिना आंदोलन करते हुए शासन तक अपनी मांग पहुंचाने का दावा किया था।
इसके बाद शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों ने विभागीय अधिकारियों से मुलाकात कर समाधान की मांग तेज की। विभिन्न शिक्षक संगठनों के नेताओं ने भी संयुक्त रूप से कहा था कि यह किसी एक संगठन की नहीं, बल्कि प्रदेश के प्रभावित सेवारत शिक्षकों की सेवा सुरक्षा से जुड़ी लड़ाई है।
मुख्यमंत्री और शिक्षामंत्री से शिक्षक साझा मंच को मिला था ठोस आश्वासन
आंदोलन को आगे बढ़ाने की तैयारी के साथ लगातार संवाद कार्यक्रम चलाए गए। इसी क्रम में मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से मुलाकात हुई और प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात कर TET की अनिवार्यता से प्रभावित शिक्षकों की सेवा सुरक्षा का मुद्दा प्रमुखता से रखा।मुख्यमंत्री की ओर से शिक्षकों को सेवा सुरक्षा को लेकर भरोसा दिलाए जाने के बाद मंच ने तत्काल टकराव का रास्ता छोड़कर सरकार के साथ संवाद को प्राथमिकता दी। इसके बाद शिक्षक साझा मंच के प्रतिनिधि लगातार DPI, शिक्षा सचिव और अन्य विभागीय अधिकारियों से मुलाकात करते रहे। अगस्त में भी मंच के प्रतिनिधियों ने शिक्षा सचिव और DPI के समक्ष सेवा सुरक्षा तथा विभागीय परीक्षा की मांग रखी थी।
शिक्षक साझा मंच का कहना है कि
उन्होंने कहा कि सरकार को विभागीय परीक्षा की प्रक्रिया को जल्द स्पष्ट करते हुए शिक्षकों को यह भरोसा देना चाहिए कि किसी भी सेवारत शिक्षक का भविष्य अनिश्चित नहीं छोड़ा जाएगा।
रविन्द्र राठौर बोले—सेवा दे रहे शिक्षकों को असुरक्षा में नहीं छोड़ा जा सकता
छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष रविन्द्र राठौर ने कहा कि वर्षों से शासकीय सेवा दे रहे शिक्षकों के सामने TET की अनिवार्यता के कारण नौकरी और भविष्य को लेकर चिंता पैदा हुई है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार TET को अनिवार्य मानती है तो सेवारत शिक्षकों के लिए व्यावहारिक रास्ता भी उपलब्ध कराना होगा।
राठौर के अनुसार, पिछले महीने ज़ब शिक्षक साझा मंच DPI और शिक्षा सचिव से मुलाकात किया था तब उन्होंने प्रभावित शिक्षकों के लिए विभागीय स्तर पर भी विभागीय TET अथवा परीक्षा आयोजित करने की दिशा में तैयारी किए जाने की जानकारी दी गई थी, जल्द ही नोटिफिकेशन निकलने की भी बात कही थी, लेकिन अब तक स्पष्ट अधिसूचना या आदेश सामने नहीं आया है। ऐसे में शिक्षकों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि सरकार के आश्वासन के बाद ठोस निर्णय कब तक लिया जाएगा?
विकास राजपूत—वरिष्ठता और पदोन्नति का अधिकार सुरक्षित हो
नवीन शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विकास राजपूत ने कहा कि TET के मुद्दे का सीधा असर शिक्षकों की वरिष्ठता और पदोन्नति पर भी पड़ रहा है। वर्षों से सेवा दे रहे वरिष्ठ शिक्षकों के सामने भविष्य को लेकर अनिश्चितता पैदा होना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि शासन को इस पूरे मामले का ऐसा समाधान निकालना चाहिए जिससे वरिष्ठ शिक्षकों की वरिष्ठता प्रभावित न हो और उन्हें पदोन्नति का अवसर भी सुरक्षित मिले। राजपूत ने मांग की कि सरकार द्वारा दिए गए समय और उपलब्ध कानूनी विकल्पों का उपयोग करते हुए प्रभावित शिक्षकों को पर्याप्त अवसर दिया जाए।
प्रदीप पाण्डेय—आश्वासन को अब शासनादेश में बदलने की जरूरत
सर्व शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप पाण्डेय ने कहा कि शिक्षकों ने सरकार के आश्वासन पर भरोसा करते हुए आंदोलन को वापस लिया था। अब उस भरोसे को बनाए रखने की जिम्मेदारी शासन की है।
पाण्डेय ने कहा कि शिक्षक व्यवस्था को बाधित नहीं करना चाहते, बल्कि अपने भविष्य को लेकर स्पष्ट और न्यायसंगत समाधान चाहते हैं। उन्होंने कहा कि सेवा सुरक्षा का मुद्दा केवल नौकरी बचाने का नहीं, बल्कि वर्षों की सेवा, वरिष्ठता और शिक्षक के सम्मान से जुड़ा हुआ है। इसलिए विभागीय स्तर पर जल्द से जल्द स्पष्ट निर्णय लिया जाना चाहिए।
लैलून भारद्वाज—शिक्षकों की चिंता दूर करे सरकार
शिक्षक नेता लैलून भारद्वाज ने कहा कि TET को लेकर शिक्षकों के बीच बनी असमंजस की स्थिति को सरकार को गंभीरता से लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो शिक्षक वर्षों से विद्यालयों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, उनके सामने अचानक सेवा सुरक्षा का प्रश्न खड़ा होना चिंता का विषय है।
जाकेश साहू—विभागीय परीक्षा का रास्ता जल्द खोला जाए
शिक्षक नेता जाकेश साहू ने कहा कि सरकार और विभाग के बीच संवाद कई स्तरों पर हो चुका है। अब आवश्यकता केवल चर्चा की नहीं, बल्कि निर्णय और आदेश की है अन्यथा सड़क में हमारा आंदोलन दिखेगा।
चेतन बघेल—आंदोलन नहीं, समाधान चाहता है शिक्षक समाज
शिक्षक नेता चेतन बघेल ने कहा कि शिक्षक साझा मंच लगातार लोकतांत्रिक और संवादात्मक तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचाता रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से मिले आश्वासन के बाद शिक्षकों ने सरकार पर विश्वास किया है। अब शासन को उस विश्वास को कायम रखते हुए TET अनिवार्यता और सेवा सुरक्षा के मामले में जल्द स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए।
अब मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से होगी सीधी मुलाकात
शिक्षक साझा मंच के प्रतिनिधि मण्डल अब एक बार फिर मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से मुलाकात कर पूर्व में मिले आश्वासन की स्थिति, विभागीय TET की प्रक्रिया और सेवा सुरक्षा के ठोस प्रावधान पर स्पष्ट जवाब मांगेगा और स्पष्ट किया आएगा आवाज़ नहीं सुने जाने के स्थिति में चरणबद्ध आंदोलन के लिए शिक्षक साझा मंच तैयार रहेगा।
शिक्षक साझा मंच के प्रवक्ता अशोक धुर्वे और मोहम्मद यासीर इरफ़ान ने कहा कि सरकार के साथ संवाद का रास्ता अभी भी खुला है और शिक्षक समाधान चाहते हैं, लेकिन यदि लगातार समय बीतने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती है, तो मंच आगामी रणनीति पर विचार करेगा।

