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भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने देश के अन्नदाताओं को प्रकृति की अनिश्चितताओं से बचाने के लिए अपनी ‘ग्रामीण कृषि मौसम सेवा’ (GKMS) को अब सूक्ष्म स्तर पर लागू कर दिया है। इसके तहत देश के हर राज्य के किसानों को अगले पांच दिनों का सटीक मौसम पूर्वानुमान प्रदान किया जा रहा है, जिसमें वर्षा, तापमान, हवा की गति और दिशा जैसे महत्वपूर्ण आंकड़े शामिल होते हैं। विभाग केवल जिला स्तर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अब ब्लॉक और ग्राम पंचायत स्तर तक की सटीक जानकारी साझा कर रहा है, ताकि किसान अपनी बुआई, सिंचाई और कटाई की योजनाओं को मौसम के अनुकूल बना सकें।

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सूचना को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए देश भर के 127 कृषि-जलवायु क्षेत्रों में 130 कृषि-मौसम फील्ड इकाइयाँ (AMFU) सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। ये इकाइयाँ हर मंगलवार और शुक्रवार को क्षेत्रीय भाषाओं में विशेष ‘कृषि-मौसम सलाह’ जारी करती हैं, जो पूरी तरह से उस क्षेत्र की विशेष भौगोलिक परिस्थितियों पर आधारित होती हैं। इसके अलावा, यदि मौसम विभाग किसी गंभीर आपदा या चक्रवात की चेतावनी जारी करता है, तो ये इकाइयाँ ‘प्रभाव-आधारित पूर्वानुमान’ तैयार करती हैं, जो किसानों को यह समझने में मदद करता है कि खराब मौसम का उनकी फसलों पर असल में क्या असर होगा और उन्हें उससे बचने के लिए क्या उपचारात्मक कदम उठाने चाहिए।

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डिजिटल इंडिया के विजन को आगे बढ़ाते हुए मौसम की जानकारी अब रेडियो और टीवी से निकलकर सीधे किसानों के मोबाइल फोन तक पहुँच गई है। पीपीपी (सार्वजनिक-निजी भागीदारी) मॉडल और राज्य सरकारों के आईटी प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से लगभग 1.56 करोड़ किसान रीयल-टाइम अपडेट प्राप्त कर रहे हैं। विशेष रूप से डिजाइन किए गए ‘मेघदूत’ और ‘मौसम’ जैसे मोबाइल ऐप्स, और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए किसानों को स्थान-विशिष्ट (Location-specific) भविष्यवाणियाँ मिल रही हैं। सरकार ने इस सेवा को ‘ई-ग्रामस्वराज’ और ‘मेरी पंचायत’ जैसे सरकारी पोर्टल्स के साथ भी एकीकृत कर दिया है, जिससे पंचायत स्तर पर मौसम की जानकारी कहीं भी और कभी भी सुलभ हो गई है।

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अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी (Last-mile connectivity) सुनिश्चित करने के लिए इस अभियान में मानवीय और तकनीकी दोनों संसाधनों का बेहतरीन समन्वय किया गया है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के तहत कार्यरत ‘कृषि सखी’ और ‘पशु सखी’ जैसी स्थानीय कार्यकर्ता अब मौसम की जानकारी को गाँव के हर घर तक पहुँचाने का माध्यम बन रही हैं। इस त्रि-स्तरीय व्यवस्था (तकनीक, स्थानीय प्रशासन और मानवीय संपर्क) का मुख्य उद्देश्य यह है कि दूर-दराज और संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाला छोटे से छोटा किसान भी मौसम के जोखिमों से सुरक्षित रहे और आधुनिक जानकारी के बल पर अपनी आय को बढ़ा सके।

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