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नई दिल्ली। आज यानी 12 अगस्त 2026 को साल का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है। खगोलशास्त्रियों के अनुसार, यह कोई साधारण सूर्य ग्रहण नहीं बल्कि एक ‘पूर्ण सूर्य ग्रहण’ (Total Solar Eclipse) होगा, जिसमें चंद्रमा कुछ समय के लिए सूर्य को पूरी तरह से ढक लेगा।
दिन के समय अंधेरा छा जाने जैसी यह दुर्लभ खगोलीय घटना दुनिया के कई हिस्सों में कौतूहल का केंद्र बनी हुई है। हालांकि, भारत में रहने वाले लोगों को इसका प्रत्यक्ष नज़ारा देखने को नहीं मिलेगा।
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Solar Eclipse Time: जानिए भारत में कब और कैसे लगेगा ग्रहण
12 अगस्त का यह पूर्ण सूर्य ग्रहण भारतीय समय (IST) के अनुसार रात के समय शुरू होगा और इसकी खगोलीय अवधि 13 अगस्त की अलसुबह तक बनी रहेगी।
भारत में क्यों नहीं दिखेगा?
ग्रहण का मुख्य और पूर्ण चरण जब चरम पर होगा, उस समय भारत में रात होगी। यही वजह है कि देश के किसी भी हिस्से से सूर्य और चंद्रमा का यह अद्भुत संयोग नहीं देखा जा सकेगा।
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Global View: किन-किन देशों में दिखेगा Total Solar Eclipse?
ग्रहण की मुख्य ‘टोटैलिटी बेल्ट’ (पूर्णता की पट्टी) उत्तरी गोलार्ध के कुछ खास इलाकों से होकर गुजरेगी:
यह पूर्ण सूर्य ग्रहण उत्तरी रूस, ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन और पुर्तगाल के कुछ क्षेत्रों में स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।
इन देशों में कुछ मिनटों के लिए दिन में अंधेरा छा जाएगा और लोग सूर्य के बाहरी आभामंडल यानी ‘कोरोना’ (Corona) का दुर्लभ नज़ारा देख सकेंगे, जो खगोलीय अनुसंधान के लिए बेहद अहम माना जाता है।
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Sutak Kaal in India: क्या भारत में मान्य होगा सूतक काल?
भारत में सूर्य ग्रहण के समय धार्मिक नियमों और सूतक काल (Sutak Period) को लेकर काफी असमंजस रहता है। पंचांग और हिंदू ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार:
सूतक काल लागू नहीं होगा:
शास्त्रगत परंपरा है कि ग्रहण जिस भू-भाग या स्थान पर दृश्यमान (विजिबल) नहीं होता, वहां उसका सूतक काल मान्य नहीं माना जाता।
पूजा-पाठ और मंदिर:
चूंकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए देश में सूतक काल लागू नहीं होगा। इस दौरान मंदिर खुले रहेंगे और लोग अपनी सामान्य दिनचर्या के अनुसार दैनिक पूजा-पाठ व धार्मिक कार्य कर सकते हैं।
(नोट: धार्मिक मान्यताएं स्थानीय पंचांगों और पारिवारिक परंपराओं पर भी निर्भर करती हैं, इसलिए श्रद्धालु अपनी व्यक्तिगत आस्था के अनुसार भी निर्णय ले सकते हैं।)

