भोपाल। माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) द्वारा आयोजित होने वाली कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं 10 फरवरी से शुरू हो रही हैं। इस बार परीक्षाओं की शुचिता बनाए रखने और प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए बोर्ड ने नियमों में आमूलचूल परिवर्तन किए हैं। इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य परीक्षा केंद्रों पर होने वाली साठगांठ और ‘जुगाड़’ को पूरी तरह खत्म करना है।
ड्यूटी के लिए कड़े पात्रता मापदंड
बोर्ड ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि इस बार उन शिक्षकों को केंद्राध्यक्ष या पर्यवेक्षक नहीं बनाया जाएगा, जिनके स्वयं के बच्चे इस साल बोर्ड परीक्षा में शामिल हो रहे हैं। इसके अलावा, गंभीर बीमारियों से जूझ रहे कर्मचारियों को भी परीक्षा ड्यूटी से राहत दी गई है। एक और महत्वपूर्ण बदलाव के तहत, हायर सेकेंडरी स्कूलों के शिक्षकों को उनके अपने विषयों के प्रश्नपत्र वाले दिन पर्यवेक्षक (इन्विजिलेटर) के रूप में तैनात नहीं किया जाएगा।
केंद्राध्यक्षों के चयन की नई पारदर्शी प्रक्रिया
अब केंद्राध्यक्ष और सहायक केंद्राध्यक्ष की नियुक्ति विकासखंड स्तर पर नहीं होगी। इसके लिए जिला स्तर पर एक व्यापक सूची तैयार की जाएगी, जिसे जिला कलेक्टर की अध्यक्षता वाली समिति अनुमोदित करेगी। पारदर्शिता लाने के लिए इस सूची को जिला सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) के विशेष सॉफ्टवेयर में डाला जाएगा।
यह सॉफ्टवेयर रैंडम पद्धति (Randomization) से शिक्षकों को परीक्षा केंद्र आवंटित करेगा। इस तकनीक के उपयोग से किसी खास केंद्र पर नियुक्ति पाने के लिए की जाने वाली सिफारिशों और जोड़-तोड़ पर लगाम लगेगी।
दागी और लापरवाह शिक्षकों पर गाज
बोर्ड ने उन शिक्षकों और प्राचार्यों को परीक्षा कार्य से पूरी तरह बाहर कर दिया है, जो पिछले वर्षों में सामूहिक नकल रोकने में विफल रहे थे या जिन पर गोपनीयता भंग करने के आरोप लगे थे। लापरवाही बरतने वाले ऐसे कर्मचारियों को अगले 5 वर्षों के लिए डिबार (प्रतिबंधित) कर दिया गया है।
सुरक्षा प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन
परीक्षा नियंत्रक बलवंत वर्मा के अनुसार, प्रश्नपत्रों के वितरण से लेकर उत्तरपुस्तिकाओं के संकलन तक, हर चरण में निर्धारित प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन किया जाएगा। केंद्रों पर उत्तरपुस्तिकाओं की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं ताकि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे।
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