नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने वाहन ऋण (Vehicle Loan) की किस्तों में चूक होने पर फाइनेंस कंपनियों और बैंकों द्वारा की जाने वाली मनमानी व जबरन जब्ती पर कड़ा रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को निर्देश दिया है कि वह बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) के लिए वाहन जब्ती से जुड़े नियमों को धरातल पर कड़ाई से लागू कराए। अदालत ने दो टूक कहा कि किसी भी कर्जदार की गाड़ी केवल वैध कानूनी प्रक्रिया से ही जब्त हो सकती है; बल प्रयोग, धोखाधड़ी या रिकवरी एजेंटों की गुंडागर्दी से नहीं।
न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने ‘चोलामंडलम इन्वेस्टमेन्ट एंड फाइनेंस कंपनी लिमिटेड’ से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया।
चोलामंडलम फाइनेंस पर भारी जुर्माना और रिफंड के आदेश
अदालत ने पीड़ित ट्रक मालिक के पक्ष में फैसला सुनाते हुए फाइनेंस कंपनी को निम्नलिखित निर्देश दिए:
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₹10 लाख मुआवजा: अवैध जब्ती से मानसिक प्रताड़ना और आजीविका के नुकसान के एवज में ग्राहक को ₹10 लाख का मुआवजा देने का आदेश।
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नीलामी राशि की वापसी: जब्त वाहन को बेचकर मिले ₹4.5 लाख रुपये 6% वार्षिक ब्याज सहित ग्राहक को लौटाए जाएं।
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लोन खाते बंद: पीड़ित के संबंधित सभी लोन खातों को तत्काल बंद किया जाए।
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मुकदमा खर्च: कंपनी पीड़ित को मुकदमे के खर्च के रूप में ₹50,000 का अतिरिक्त भुगतान करेगी।
“अंधेरे में वाहन उठाना वित्तीय समावेशन नहीं, उत्पीड़न है”
न्यायमूर्ति नरसिम्हा ने फैसले में टिप्पणी की कि लोन एग्रीमेंट में कब्जा लेने की शर्त का मतलब यह नहीं है कि फाइनेंसर को रात के अंधेरे में बलपूर्वक संपत्ति छीनने का खुला लाइसेंस मिल गया है। अदालत ने कहा कि जिस वित्तीय व्यवस्था को छोटे ऑपरेटरों की मदद के लिए बनाया गया था, वह अनियंत्रित शर्तों के कारण उनके उत्पीड़न का जरिया नहीं बन सकती।पीठ ने इस बात पर भी गंभीर चिंता जताई कि आरबीआई के सर्कुलर और गाइडलाइंस फिलहाल सिर्फ “कागजों पर” सीमित हैं। कोर्ट ने साफ किया कि:
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रिकवरी एजेंट ग्राहकों को बेमौसम या अजीब समय पर डरा-धमका नहीं सकते।
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जब्ती की प्रक्रिया में पर्याप्त नोटिस अवधि, अंतिम भुगतान का अवसर और नीलामी के नियमों का पारदर्शी पालन अनिवार्य होना चाहिए।
क्या था पूरा मामला?
हरि दत्ता शर्मा ने चोलामंडलम फाइनेंस से ₹10.40 लाख का लोन लेकर ‘टाटा SFC 407’ ट्रक खरीदा था। किस्तें बकाया होने पर 9 अप्रैल 2023 की रात करीब 1 बजे चार अज्ञात लोगों ने बिना किसी लिखित पूर्व नोटिस के ट्रक के स्टीयरिंग का लॉक तोड़ा और उसे जबरन ले गए। बाद में कंपनी ने वाहन को ₹4.5 लाख में नीलाम कर दिया और ग्राहक पर ₹5.71 लाख की अतिरिक्त देनदारी निकाल दी।
सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरी कार्रवाई को गैरकानूनी और आरबीआई नियमों व भारतीय अनुबंध अधिनियम (Indian Contract Act, 1872) के सिद्धांतों का खुला उल्लंघन करार दिया।

