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जशपुर | पूर्व विधायक एवं जिलाध्यक्ष कांग्रेस जशपुर यूडी मिंज ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा अरावली पर्वत श्रृंखला से जुड़े 100 मीटर ऊँचाई नियम पर रोक लगाए जाने के फैसले का स्वागत करते हुए इसे जशपुर जिला जैसे वन एवं आदिवासी जिलों के लिए ऐतिहासिक और दूरगामी महत्व का निर्णय बताया है।
श्री मिंज ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला स्पष्ट करता है कि प्रकृति, पहाड़ और जंगलों का मूल्य केवल ऊँचाई के आधार पर नहीं, बल्कि उनकी पारिस्थितिक, सामाजिक और सांस्कृतिक भूमिका के आधार पर तय किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि 100 मीटर वाला नियम लागू हो जाता, तो जशपुर की कई पठारी पहाड़ियाँ, वन क्षेत्र और जलस्रोत कागज़ों में गैर-पर्वतीय घोषित होकर खनन और औद्योगिक दोहन के लिए खोल दिए जाते।
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उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जशपुर जिला पहले से ही खनिज सर्वे, जंगल कटाई और संसाधनों के व्यावसायिक दोहन के दबाव से जूझ रहा है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय आदिवासी समाज, पर्यावरण संरक्षण और जल-सुरक्षा के लिए एक मजबूत संवैधानिक ढाल है।
श्री मिंज ने कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा से वन अधिकार अधिनियम, आदिवासी हितों और पर्यावरण संरक्षण के पक्ष में रही है और आगे भी जशपुर की प्रकृति, संस्कृति और जनजीवन की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष करती रहेगी।

उन्होंने प्रशासन से भी अपील की कि इस फैसले की भावना के अनुरूप किसी भी प्रकार की विनाशकारी गतिविधियों को अनुमति न दी जाए।
उन्होंने आगे कहा कि जशपुर जिला जैव-विविधता की दृष्टि से एक संरक्षित और अत्यंत समृद्ध क्षेत्र है, जहाँ चार प्रकार के मौसम पाए जाते हैं। इस विशिष्ट भौगोलिक और जलवायु विविधता के कारण जिले में विभिन्न प्रकार के फल, सब्ज़ियों और औषधीय फसलों का उत्पादन संभव है। साथ ही, प्राकृतिक सौंदर्य, जलप्रपात, पहाड़ और वन क्षेत्र पर्यटन की अपार संभावनाएँ भी रखते हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि जशपुर के विकास का रास्ता खनन नहीं, बल्कि कृषि, बागवानी, जैविक उत्पाद और पर्यावरण आधारित पर्यटन होना चाहिए, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिले और प्रकृति भी सुरक्षित रहे।

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