पीएम श्री एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय छुरीकला में विद्यार्थी संवाद कार्यक्रम का सफल आयोजन
जशपुर
जिले में संचालित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों में शिक्षकीय और गैर शिक्षकीय संविदा पदों की भर्ती अब एक गंभीर सवाल बन चुकी है। करीब छह महीने बीत जाने के बावजूद शिक्षा विभाग आज तक भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाया है। इस लापरवाही से हजारों शिक्षित बेरोजगार युवाओं उनके परिजनों में भारी आक्रोश और निराशा व्याप्त है।
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स्वामी आत्मानंद वेकेंसी 2025 के अंतर्गत जशपुर जिले के 11 विद्यालयों में व्याख्याता प्रधान पाठक शिक्षक सहायक शिक्षक कंप्यूटर शिक्षक प्रयोगशाला सहायक और सहायक ग्रेड 2 3 जैसे पदों के लिए ऑनलाइन आवेदन 11 जुलाई 2025 तक आमंत्रित किए गए थे। बड़ी संख्या में युवाओं ने उम्मीद के साथ आवेदन किया लेकिन उसके बाद पूरी प्रक्रिया ठप होकर रह गई।
इस बीच स्कूलों में तिमाही और छमाही परीक्षाएं भी हो चुकी हैं और अब प्री बोर्ड परीक्षा सिर पर है जबकि फरवरी में बोर्ड परीक्षा शुरू होने वाली है। इसके बावजूद शिक्षकों की भारी कमी बनी हुई है। स्वामी आत्मानंद स्कूलों की शैक्षणिक व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो रही है लेकिन शिक्षा विभाग आंख मूंदे बैठा है।पूरा ध्यान भ्रष्टाचार और उगाही करने में लगा है.
जिला अध्यक्ष कांग्रेस और पूर्व विधायक यू डी मिंज ने इस पूरे मामले पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि शिक्षा विभाग बेरोजगार युवाओं के साथ मजाक कर रहा है। भर्ती प्रक्रिया को जानबूझकर लटकाया जा रहा है जिससे सेटिंग और लेनदेन की आशंका और मजबूत हो रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर छह महीने में भी भर्ती पूरी क्यों नहीं हो सकी।
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यू डी मिंज ने कहा कि जिन अधिकारियों ने भर्ती को जानबूझकर लंबित रखा है उनसे कलेक्टर को जवाब मांगना चाहिए। लेकिन हैरानी की बात यह है कि कलेक्टर स्तर से भी कोई सख्ती नजर नहीं आ रही है। ना कोई शो कॉज नोटिस जारी हुआ और ना ही किसी तरह की जिम्मेदारी तय की गई। इससे यह साफ संकेत मिल रहा है कि प्रशासन भी इस लापरवाही पर उदासीन बना हुआ है।
बेरोजगार अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती में देरी का सीधा असर उनके भविष्य पर पड़ रहा है। पढ़ाई और तैयारी के बावजूद नौकरी नहीं मिल रही है और दूसरी ओर स्कूलों में शिक्षक नहीं होने से बच्चों की पढ़ाई चौपट हो रही है। यह स्थिति शिक्षा व्यवस्था और युवाओं दोनों के साथ अन्याय है।
यू डी मिंज ने कहा कि यह तथाकथित सुशासन की सरकार की असली तस्वीर है जहां न युवा सुरक्षित हैं और न ही शिक्षा व्यवस्था। सुस्त प्रशासन और गैर जिम्मेदार विभाग ने हालात को बद से बदतर बना दिया है। यदि जल्द भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं की गई तो आंदोलन के लिए सरकार और प्रशासन खुद जिम्मेदार होगा।
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यह मामला अब केवल भर्ती का नहीं बल्कि शिक्षित बेरोजगारों के आत्मसम्मान और भविष्य का बन चुका है। अब देखने वाली बात यह है कि प्रशासन नींद से जागता है या फिर युवाओं का यह गुस्सा सड़कों पर फूटता है।

