मुंबई, 3 नवंबर 2025
भारत की महिला क्रिकेट टीम ने पहली बार वनडे विश्व कप का खिताब जीतकर नया इतिहास रच दिया है। फाइनल मुकाबले में भारतीय टीम ने दक्षिण अफ्रीका को 52 रन से हराया। यह जीत सिर्फ एक ट्रॉफी नहीं, बल्कि मेहनत, हौसले और विश्वास की वह मिसाल है, जिसने करोड़ों भारतीयों का सपना साकार किया।
52 साल के महिला वनडे विश्व कप इतिहास में पहली बार भारत ने यह गौरव हासिल किया। स्मृति मंधाना की चमक, शेफाली वर्मा की निडरता, जेमिमा रॉड्रिग्स की जादुई बल्लेबाजी और कप्तान हरमनप्रीत कौर के नेतृत्व ने टीम इंडिया को यह ऐतिहासिक मुकाम दिलाया।
भारत की 11 विजेता बेटियाँ: संघर्ष से चमक तक
1. स्मृति मंधाना – भारतीय बल्लेबाजी की खूबसूरत तस्वीर
महाराष्ट्र के सांगली की रहने वाली स्मृति मंधाना बचपन से ही लड़कों के साथ क्रिकेट खेलती थीं। पिता और भाई दोनों क्लब क्रिकेटर थे, जिससे उन्हें खेल की समझ बचपन से मिली।
उनकी टाइमिंग और शॉट सेलेक्शन ने उन्हें भारतीय टीम की सबसे भरोसेमंद खिलाड़ी बना दिया। मंधाना ने कई बार टीम को मुश्किल परिस्थितियों से निकाला है। आज वह न सिर्फ भारत बल्कि विश्व क्रिकेट की आइकन बन चुकी हैं।
2. शेफाली वर्मा – निडरपन की मिसाल
हरियाणा के रोहतक की शेफाली वर्मा ने बचपन में गली क्रिकेट से शुरुआत की। लोगों ने कहा “ये तो लड़कों का खेल है,” लेकिन शेफाली नहीं रुकीं।
सिर्फ 15 साल की उम्र में उन्होंने भारत के लिए डेब्यू किया और अब उनकी आक्रामक बल्लेबाजी हर गेंदबाज की परीक्षा लेती है। फाइनल में उनके तेजतर्रार शॉट्स ने मैच का रुख मोड़ दिया।
3. जेमिमा रॉड्रिग्स – मुंबई की गलियों से विश्व कप की चमक तक
मुंबई की जेमिमा रॉड्रिग्स चर्च संगीतकार परिवार से आती हैं। पिता स्कूल में क्रिकेट कोच हैं। जेमिमा ने पढ़ाई, संगीत और क्रिकेट — तीनों में संतुलन बनाए रखा।
सेमीफाइनल में उनकी शतकीय पारी भारत की यादगार जीत की नींव बनी। उनकी मुस्कान जितनी प्यारी है, बल्लेबाजी उतनी ही धारदार।
4. हरमनप्रीत कौर – कप्तान, योद्धा और प्रेरणा की मूर्ति
पंजाब के मोगा की हरमनप्रीत कौर भारतीय महिला क्रिकेट की धड़कन हैं। 2017 विश्व कप में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उनकी 171 रनों की ऐतिहासिक पारी ने उन्हें ‘लेडी धोनी’ बना दिया था।
इस बार, कप्तान के रूप में उन्होंने न सिर्फ टीम को प्रेरित किया बल्कि खुद भी फ्रंटफुट पर खेलकर उदाहरण पेश किया।
हरमनप्रीत कौर भारत की पहली कप्तान बनीं जिन्होंने महिला वनडे विश्व कप ट्रॉफी उठाई।
5. दीप्ति शर्मा – हार से इतिहास तक का सफर
2017 की हार दीप्ति शर्मा के लिए सबसे बड़ा सबक बनी। उन्होंने अपनी गेंदबाजी और बल्लेबाजी दोनों में सुधार किया और 2025 के विश्व कप में ऑलराउंड प्रदर्शन से टीम को खिताब दिलाया।
उनकी शांत लेकिन प्रभावशाली मौजूदगी टीम की असली ताकत रही।
6. रेणुका ठाकुर – रफ्तार की रानी
हिमाचल प्रदेश की रेणुका ठाकुर अपने स्विंग और सटीक यॉर्कर के लिए जानी जाती हैं। फाइनल में शुरुआती ओवरों में उनके शानदार स्पैल ने दक्षिण अफ्रीका को दबाव में ला दिया।
रेणुका भारतीय तेज गेंदबाजी की नई पहचान हैं।
7. ऋचा घोष – फुर्तीली विकेटकीपर और आक्रामक फिनिशर
पश्चिम बंगाल की ऋचा घोष ने साबित किया कि विकेट के पीछे फुर्ती और बल्ले से विस्फोटक बल्लेबाजी दोनों में वे लाजवाब हैं।
फाइनल में उन्होंने ताबड़तोड़ 38 रन बनाकर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया।
8. पूजा वस्त्राकर – हर मौके पर भरोसे की खिलाड़ी
मध्य प्रदेश की पूजा वस्त्राकर गेंद और बल्ले दोनों से अहम योगदान देती हैं। कठिन हालात में उनका संयमित खेल और विकेट लेने की क्षमता टीम के लिए अमूल्य साबित हुई।
9. स्नेह राणा – ऑलराउंड प्रदर्शन की मिसाल
उत्तराखंड की स्नेह राणा ने स्पिन और बल्लेबाजी दोनों में शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने बीच के ओवरों में विपक्षी बल्लेबाजों को बांधे रखा और निचले क्रम में उपयोगी रन जोड़े।
10. तानिया भाटिया – साइलेंट स्ट्रेंथ
भले तानिया सुर्खियों में कम रहती हैं, लेकिन विकेट के पीछे उनका अनुशासन और फील्ड में उनकी ऊर्जा टीम की आत्मा है। उन्होंने फाइनल में अहम कैच लेकर गेम पलट दिया।
11. प्रतिका रावल – पर्दे के पीछे की नायिका
प्रतिका भले फाइनल प्लेइंग-इलेवन में नहीं थीं, पर नेट सेशन में उन्होंने टीम की तैयारी में बड़ा योगदान दिया। हर मैच से पहले उन्होंने बॉलिंग पार्टनर बनकर खिलाड़ियों को तैयार किया।
हर टीम की जीत के पीछे ऐसे साइलेंट वॉरियर होते हैं, और प्रतिका उन्हीं में से एक हैं।
52 साल बाद भारत की नई कहानी
भारत की यह जीत 1983 में पुरुष टीम द्वारा जीते विश्व कप की याद दिलाती है।
जहां कपिल देव के नेतृत्व में भारत ने दुनिया को चौंकाया था, वहीं हरमनप्रीत कौर की टीम ने इस बार महिला क्रिकेट को नई पहचान दी है।
यह सिर्फ क्रिकेट की जीत नहीं, बल्कि भारतीय महिला शक्ति की जीत है।

