भोपाल। मध्य प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर शिक्षकों का विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है। परीक्षा के आवेदन की अंतिम तारीख सोमवार यानी 5 अक्टूबर को खत्म हो रही है, लेकिन प्रदेश के हजारों शिक्षक अब तक आवेदन से दूरी बनाए हुए हैं। राजधानी भोपाल के नीलम पार्क में 27 सितंबर से चल रहे अनिश्चितकालीन धरने के आठवें दिन शिक्षकों ने क्रमिक भूख हड़ताल भी शुरू कर दी है।
आंदोलन कर रहे शिक्षकों का कहना है कि वर्षों से सरकारी सेवा में काम करने के बाद उन्हें दोबारा शिक्षक पात्रता परीक्षा के दायरे में लाना उचित नहीं है। उनका सवाल है कि जब सेवा के दौरान उनके पद और जिम्मेदारियां कई बार बदल चुकी हैं, तो विभाग पहले यह स्पष्ट करे कि उन्हें आखिर किस पद के लिए TET देनी होगी।
23 हजार से ज्यादा आवेदन, फिर भी शिक्षक आंदोलन पर कायम
शिक्षक पात्रता परीक्षा के लिए आवेदन की अंतिम तारीख पहले 18 सितंबर निर्धारित की गई थी, जिसे बढ़ाकर 5 अक्टूबर किया गया। इसके बावजूद अब तक 23 हजार से अधिक शिक्षकों ने ही आवेदन किया है।
शिक्षक संगठनों का आरोप है कि आवेदन की तारीख नजदीक आने के बाद जिला शिक्षा अधिकारियों और संकुल प्राचार्यों के माध्यम से शिक्षकों पर फॉर्म भरने का दबाव बनाया जा रहा है। संगठनों का कहना है कि सरकार को दबाव बनाने के बजाय शिक्षक प्रतिनिधियों के साथ बातचीत कर उनकी आपत्तियों का समाधान करना चाहिए।
1998 में शिक्षाकर्मी से शुरुआत, अब किस पद की TET?
आंदोलन कर रहे शिक्षकों का कहना है कि उनकी सेवा का स्वरूप समय के साथ बदलता रहा है। कई शिक्षकों ने 1998 में शिक्षाकर्मी के रूप में सेवा शुरू की थी। इसके बाद 2011 में वे अध्यापक बने और वर्ष 2024 में कुछ शिक्षकों को उच्च माध्यमिक शिक्षक का प्रभार दिया गया।
ऐसे में शिक्षकों का सवाल है कि मौजूदा स्थिति में उन्हें किस पद के लिए पात्रता परीक्षा देनी होगी। उनका कहना है कि सरकार को पहले इस स्थिति को स्पष्ट करना चाहिए और इसके बाद परीक्षा को लेकर निर्णय लेना चाहिए।
परीक्षा शुल्क को लेकर भी नाराजगी
शिक्षक संगठनों ने TET के लिए निर्धारित परीक्षा शुल्क पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जो शिक्षक लंबे समय से सरकारी सेवा में कार्यरत हैं, उनसे दोबारा पात्रता जांच के नाम पर परीक्षा शुल्क लेना उचित नहीं है।
शिक्षकों का कहना है कि यदि सरकार उनकी योग्यता या सेवा की समीक्षा करना चाहती है तो इसके लिए स्पष्ट, पारदर्शी और न्यायसंगत प्रक्रिया तय की जानी चाहिए।
आंदोलन स्थल से आवेदन नहीं करने की अपील
भोपाल के नीलम पार्क में चल रहे आंदोलन के दौरान शिक्षकों से TET के आवेदन नहीं करने की अपील भी की जा रही है। अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा का दावा है कि इसी वजह से प्रदेश में बड़ी संख्या में शिक्षकों ने अब तक आवेदन नहीं किया है।
मोर्चे ने सरकार से लंबे समय से सरकारी सेवा में कार्यरत शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से राहत देने की मांग की है। संगठन का कहना है कि सरकार को शिक्षकों पर आवेदन के लिए दबाव डालने के बजाय प्रतिनिधियों के साथ बातचीत कर इस विवाद का स्थायी समाधान निकालना चाहिए।
तमिलनाडु और जम्मू-कश्मीर की तर्ज पर राहत की मांग
अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा ने मध्य प्रदेश में भी लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से राहत देने की मांग की है। मोर्चा पदाधिकारियों का कहना है कि तमिलनाडु और जम्मू-कश्मीर की तर्ज पर मध्य प्रदेश में भी इस संबंध में राहत का प्रस्ताव पारित किया जाना चाहिए।
दमोह, जबलपुर और मंडला के शिक्षक भूख हड़ताल पर
नीलम पार्क में शुरू हुई क्रमिक भूख हड़ताल के पहले दिन दमोह से प्रहलाद सिंह ठाकुर, जबलपुर से जगत पटेल और मंडला से अमरसिंह चंदेला, नफीस खान तथा संजीव सोनी भूख हड़ताल पर बैठे।
शिक्षकों ने कहा कि TET की अनिवार्यता समाप्त करने समेत उनकी लंबित मांगों पर सरकार जब तक ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।


