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नई दिल्ली | 17 फरवरी, 2026
सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने एक क्रांतिकारी पहल की घोषणा की है।

अब देश के राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे केवल सुंदरता के लिए पेड़ नहीं लगाए जाएंगे, बल्कि परागणकारी जीवों को बचाने के लिए विशेष ‘मधुमक्खी गलियारे’ (Bee Corridors) विकसित किए जाएंगे। यह अपनी तरह का पहला ऐसा प्रोजेक्ट है जो सजावटी वृक्षारोपण की परंपरा को पारिस्थितिक वृक्षारोपण में बदल देगा।

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क्या है इस पहल का मुख्य उद्देश्य?

प्रकृति में मधुमक्खियों और अन्य परागणकारियों की संख्या तेजी से कम हो रही है, जिससे खेती और बागवानी की पैदावार पर बुरा असर पड़ रहा है। NHAI की इस योजना का लक्ष्य राजमार्गों के किनारे ऐसी वनस्पतियों की एक निरंतर श्रृंखला तैयार करना है, जो साल के 12 महीने मधुमक्खियों के लिए मकरंद (Nectar) और पराग सुनिश्चित कर सकें।

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इन गलियारों में पलाश, महुआ, नीम, करंज, जामुन और सिरिस जैसे देशी पेड़ों के साथ-साथ झाड़ियाँ और औषधीय घास भी लगाई जाएंगी।पौधों का चुनाव इस वैज्ञानिक पद्धति से किया जाएगा कि अलग-अलग मौसमों में फूलों के खिलने का क्रम बना रहे, ताकि मधुमक्खियों को भोजन के लिए भटकना न पड़े।

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परागणकारियों के रहने के लिए खोखले तने और प्राकृतिक लकड़ी का भी उपयोग किया जाएगा।
मधुमक्खियों की चारा खोजने की क्षमता को ध्यान में रखते हुए, राजमार्गों पर हर 500 मीटर से 1 किलोमीटर के अंतराल पर फूलों वाले पेड़ों के विशेष समूह (Clusters) लगाए जाएंगे।

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2026-27 के लिए बड़ा लक्ष्य
NHAI ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए कमर कस ली है। वर्ष 2026-27 के दौरान प्राधिकरण का लक्ष्य कुल 40 लाख पौधे लगाने का है, जिनमें से 60 प्रतिशत पौधे विशेष रूप से इसी ‘मधुमक्खी गलियारा’ पहल का हिस्सा होंगे। प्राधिकरण के प्रत्येक क्षेत्रीय कार्यालय को निर्देश दिया गया है कि वे अपने क्षेत्र में कम से कम तीन ऐसे गलियारे अनिवार्य रूप से विकसित करें।

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यह पहल न केवल यात्रा को सुखद और हरा-भरा बनाएगी, बल्कि जैव विविधता के संरक्षण में भारत की वैश्विक प्रतिबद्धता को भी मजबूत करेगी। इन गलियारों के बनने से आसपास के किसानों को भी लाभ होगा, क्योंकि बेहतर परागण से उनकी फसलों की उत्पादकता में वृद्धि होगी।

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