पेरिस:
यूरोप इस समय भीषण गर्मी, लू और वनाग्नि की विकराल लपटों की ज़द में है, जहाँ फ्रांस, स्पेन, इटली और ग्रीस जैसे देशों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुँच चुका है। द गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार, पूरे दक्षिणी यूरोप में भीषण आग के कारण 3 लाख से अधिक निवासियों और पर्यटकों को अपने घरों व होटलों को छोड़कर सुरक्षित ठिकानों पर शरण लेनी पड़ी है। अकेले फ्रांस के दक्षिण-पश्चिमी बोर्डो, जिरोंद और लांडेस इलाकों से 2 लाख 24 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है।
यूरोपीय वन अग्नि सूचना प्रणाली के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इस साल अब तक यूरोप में 4,34,976 हेक्टेयर से अधिक वन भूमि पूरी तरह तबाह हो चुकी है। इस भयावह आग के कारण वायुमंडल में अब तक 1.79 करोड़ टन कार्बन उत्सर्जित हो चुका है, जो सामान्य औसत से लगभग दोगुना है। अलजजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, अकेले स्पेन में इस महीने आग की चपेट में आने से 14 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 10 से अधिक लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।
वैज्ञानिकों का कहना है कि दक्षिणी यूरोप के हालात अब अमेरिका के कैलिफोर्निया जैसे बनते जा रहे हैं, जहाँ हर साल विशाल और बेकाबू वनाग्नि सामान्य बात हो गई है। मई महीने से जारी भीषण गर्मी और लंबे सूखे के कारण जंगलों व घास के मैदानों में नमी पूरी तरह खत्म हो गई है, जिससे एक मामूली चिंगारी भी भीषण आग का रूप ले रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यद्यपि पिछले तीन दशकों में आधुनिक विमानों, हेलीकॉप्टरों और प्रशिक्षित दमकलकर्मियों की बदौलत अग्निशमन व्यवस्था में काफी सुधार हुआ था, लेकिन वर्तमान जलवायु संकट ने इन व्यवस्थाओं को भी बेबस कर दिया है। स्पेन जैसे देशों में कृषि व पशु चराई की गतिविधियों में कमी आने और पुरानी संरक्षण नीतियों के कारण जंगलों में सूखी वनस्पति का विशाल भंडार जमा हो गया है, जो ईंधन का काम कर रहा है। इसी वजह से भले ही आग लगने की कुल घटनाएं कम हुई हों, लेकिन जो आग लग रही है उसकी तीव्रता और विनाशकारी क्षमता बेहद खतरनाक हो चुकी है।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि वैश्विक तापमान में वृद्धि और ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन पर तत्काल प्रभावी नियंत्रण नहीं लगाया गया, तो यूरोप में हर साल रिकॉर्ड तोड़ आग का तांडव एक सामान्य बात बन जाएगी। इसका गंभीर असर केवल पर्यावरण और जंगलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह मानव बस्तियों, कृषि, अर्थव्यवस्था, जैव विविधता और समग्र राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा साबित होगा।



