जशपुर: छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में उच्च शिक्षा की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जिले के प्रमुख शासकीय महाविद्यालयों में प्राध्यापकों (Professors) के स्वीकृत पद तो हैं, लेकिन धरातल पर एक भी प्राध्यापक कार्यरत नहीं है। यह स्थिति छात्रों के भविष्य और शिक्षा की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
जशपुरनगर के मुख्य कॉलेजों में ‘शून्य’ है कार्यबल
जिले के सबसे बड़े शासकीय एन.ई.एस. स्नातकोत्तर महाविद्यालय, जशपुरनगर में इतिहास, अर्थशास्त्र, भूगोल, राजनीतिशास्त्र, रसायनशास्त्र, वाणिज्य, गणित और अंग्रेजी जैसे महत्वपूर्ण विषयों के लिए 1-1 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इन सभी 8 पदों पर वर्तमान में कोई भी प्राध्यापक कार्यरत नहीं है। यही हाल विजयभूषण सिंहदेव कन्या महाविद्यालय का है, जहाँ वनस्पतिशास्त्र, माइक्रोबायोलॉजी, इतिहास और कंप्यूटर साइंस जैसे विषयों में सभी पद रिक्त पड़े हैं।
पत्थलगांव और कुनकुरी के कॉलेजों का भी बुरा हाल
शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़ रहे इन क्षेत्रों में शासकीय ठाकुर शोभासिंह महाविद्यालय, पत्थलगांव और शासकीय बाला साहब देशपांडे महाविद्यालय, कुनकुरी में भी स्थिति जस की तस है। यहाँ समाजशास्त्र, राजनीतिशास्त्र और भूगोल जैसे विषयों के स्वीकृत पदों पर नियुक्ति शून्य है। इसके अलावा, नायक नित्यानंद साय शासकीय महाविद्यालय, आरा में भी वनस्पति और रसायन शास्त्र के पद रिक्त हैं।
छात्रों के भविष्य पर संकट: केवल कागजों पर चल रही पढ़ाई?
हैरानी की बात यह है कि इन सभी कॉलेजों में प्राध्यापकों के पद स्वीकृत होने के बावजूद ‘कार्यरत’ की सूची में संख्या शून्य (0) है। इसका सीधा मतलब है कि जिले के सरकारी कॉलेजों में इन विषयों के नियमित प्राध्यापक ही नहीं हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि बिना शिक्षकों के छात्र अपनी उच्च शिक्षा की पढ़ाई कैसे पूरी करेंगे और सरकार इन रिक्त पदों को भरने के लिए क्या कदम उठा रही है।



