रायपुर। सितंबर का महीना खत्म होने के साथ ही 1 अक्टूबर 2026 से कई महत्वपूर्ण वित्तीय और प्रशासनिक नियम बदलने जा रहे हैं। इन नए नियमों का सीधा प्रभाव आम परिवारों की रसोई के बजट, बैंकिंग लेनदेन, एफडी और जरूरी सरकारी दस्तावेजों पर पड़ने वाला है। इसमें मुख्य रूप से घरेलू एलपीजी सब्सिडी के लिए बायोमेट्रिक सत्यापन, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र के विलंबित पंजीकरण और डिजिटल बैंकिंग रिकॉर्ड से जुड़े कानूनी प्रावधान शामिल हैं।
एलपीजी सब्सिडी के लिए बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण अनिवार्य
1 अक्टूबर से घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं को सब्सिडी दर पर गैस सिलेंडर प्राप्त करने के लिए आधार बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण (BAA) कराना अनिवार्य होगा। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 19 सितंबर तक देश के लगभग 89.9 फीसदी उपभोक्ता यह प्रक्रिया पूरी कर चुके हैं।
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गैस कनेक्शन बंद नहीं होगा: सरकार ने साफ किया है कि प्रमाणीकरण न होने पर कनेक्शन बंद नहीं किया जाएगा, बल्कि उपभोक्ता को बिना सब्सिडी वाला सिलेंडर (बाजार मूल्य पर) ही मिलेगा।
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ऐसे कराएं सत्यापन: उपभोक्ता डिलीवरी के समय, अपनी गैस एजेंसी जाकर या संबंधित कंपनियों के मोबाइल ऐप (IndianOil ONE, HelloBPCL या HP PAY) के माध्यम से बायोमेट्रिक सत्यापन पूरा कर सकते हैं। जिन उपभोक्ताओं का प्रमाणीकरण पहले हो चुका है, उन्हें दोबारा कुछ करने की आवश्यकता नहीं है।
जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के नियम होंगे सख्त
1 अक्टूबर से ‘जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) अधिनियम, 2026’ प्रभावी होने जा रहा है। इसके तहत यदि किसी के जन्म या मृत्यु का पंजीकरण समय पर नहीं कराया गया है, तो देर से पंजीकरण कराने की प्रक्रिया को काफी कड़ा कर दिया गया है:
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1 से 2 साल की देरी: यदि घटना के एक साल बाद और दो साल के भीतर पंजीकरण कराया जाता है, तो इसके लिए एसडीएम (SDM), जिला मजिस्ट्रेट या अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट के आदेश और भौतिक सत्यापन की आवश्यकता होगी।
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2 साल से अधिक की देरी: यदि मामला दो साल से ज्यादा पुराना है, तो प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट (First Class Judicial Magistrate) के आदेश के बिना पंजीकरण नहीं हो सकेगा।
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स्कूल दाखिले, सरकारी नौकरी, पेंशन, बैंक खातों और संपत्ति के उत्तराधिकार के लिए ये दस्तावेज बेहद अहम हैं, इसलिए लंबित मामलों को समय रहते सुलझाना जरूरी होगा।
एफडी (Bulk Deposit) की सीमा बढ़कर ₹3 करोड़ हुई
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नए दिशा-निर्देशों के तहत 1 अक्टूबर से बैंकों में ‘बल्क डिपॉजिट’ (Bulk Deposit) की न्यूनतम सीमा 2 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 3 करोड़ रुपये कर दी गई है। यह बदलाव केवल बड़ी पूंजी निवेश करने वाले संस्थानों और बड़े निवेशकों के लिए है। आम नागरिकों द्वारा कराई जाने वाली सामान्य 2, 5 या 10 लाख रुपये की रिटेल एफडी (FD) के नियमों या ब्याज दरों पर इसका कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा।
बैंकिंग रिकॉर्ड को लेकर नया कानून: डिजिटल साक्ष्य को कानूनी मान्यता
1 अक्टूबर से ‘बैंकर्स बुक्स एविडेंस एक्ट, 2026’ भी लागू होने जा रहा है, जो 1891 के ब्रिटिश कालीन पुराने कानून का स्थान लेगा। इस नए कानून के तहत अब फिजिकल रिकॉर्ड के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल, वर्चुअल और क्लाउड आधारित बैंकिंग रिकॉर्ड को भी कानूनी साक्ष्य के रूप में पूर्ण मान्यता मिल जाएगी। इससे कोर्ट-कचहरी और विवादों के मामलों में बैंक स्टेटमेंट और डिजिटल ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड को प्रमाणित करना पहले से ज्यादा आसान और मानकीकृत हो जाएगा।


