लाल आतंक का सूर्यास्त: लहू से सने जंगलों में लोकतंत्र की जीत और नक्सलियों के ‘पैकअप’ की पूरी कहानी
रायपुर:-
छत्तीसगढ़ में ‘जाम-ए-खास’ शौकीनों के लिए इस बार की होली किसी लॉटरी से कम नहीं है! अब तक जो लोग त्योहार से दो दिन पहले ही स्टॉक डंप करने के चक्कर में “बजट और बीपी” दोनों बढ़ा लेते थे, उनके लिए सरकार ने खुशियों की फुलझड़ी फोड़ दी है। नई आबकारी नीति ने उन पुराने बोरियत भरे नियमों को कूड़ेदान में डाल दिया है, जिनकी वजह से होली, दिवाली और 15 अगस्त जैसे बड़े दिनों पर मयखानों के बाहर सन्नाटा और दिल में मायूसी छाई रहती थी।
पुराने दौर की बात करें तो 15 अगस्त, 26 जनवरी, गांधी जयंती, मोहर्रम और बाबा गुरु घासीदास जयंती समेत साल के कम से कम आठ-दस दिन सूखे में बीतते थे। लेकिन अब सरकार ने दिल बड़ा करते हुए ड्राई डे की उस लंबी लिस्ट की “छंटनी” कर दी है और अब साल में केवल चार दिन ही गले सूखेंगे, बाकी दिन मस्त ‘गीले’ रहेंगे। सबसे बड़ी खुशखबरी तो यह है कि अब रंग-गुलाल के हुड़दंग के बीच आपको बंद दुकानों के शटर नहीं कोसने पड़ेंगे, क्योंकि होली और दिवाली पर अब शराब की दुकानें शान से खुली मिलेंगी।
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इस फैसले के बाद अब अवैध शराब बेचने वालों के चेहरे उतर गए हैं और चखना सेंटरों पर अभी से रौनक की आहट सुनाई देने लगी है। अब न तो आपको ऊंचे दामों पर ‘ब्लैक’ में बोतल खरीदनी पड़ेगी और न ही त्योहार का मजा किरकिरा होगा। बस प्रशासन की एक ही छोटी सी गुजारिश है—जाम छलकाइए, झूमिए, लेकिन इतने भी ‘टाइट’ मत हो जाइए कि घर का रास्ता ही भूल जाएं। आखिर पुलिस की नजर भी इस बार उतनी ही पैनी होगी, जितनी आपकी नजर आपकी पसंदीदा बोतल पर!
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