नई दिल्ली: भारत में 5G रोलआउट ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। संचार राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्रशेखर ने राज्यसभा में जानकारी दी कि वर्तमान में देश के लगभग सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 99.9% जिलों में 5G सेवाएँ उपलब्ध हो चुकी हैं। फरवरी 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, पूरे भारत में 5.23 लाख से अधिक 5G बेस ट्रांसीवर स्टेशन (BTS) स्थापित किए जा चुके हैं, जो देश की डिजिटल कनेक्टिविटी को एक नई ऊंचाई पर ले जा रहे हैं।
5G लैब्स और स्वदेशी इकोसिस्टम
सरकार केवल नेटवर्क विस्तार ही नहीं, बल्कि स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देने पर भी जोर दे रही है। इसके तहत ₹97.67 करोड़ की लागत से देशभर में 100 ‘5G लैब्स’ स्थापित की गई हैं। इन लैब्स का उपयोग कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, स्मार्ट विनिर्माण और ई-गवर्नेंस जैसे क्षेत्रों में नए प्रयोग और एप्लिकेशन विकसित करने के लिए किया जा रहा है। इसके साथ ही, आईआईटी मद्रास और आईआईएससी बेंगलुरु जैसे प्रमुख संस्थानों के सहयोग से ‘स्वदेशी 5G टेस्ट बेड’ तैयार किया गया है, जो भारत की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप तकनीक विकसित करने में सहायक सिद्ध हो रहा है।
6G की ओर बढ़ते कदम
5G की सफलता के बाद अब भारत का लक्ष्य 2030 तक 6G तकनीक में वैश्विक लीडर बनना है। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा जारी “भारत 6G विजन” दस्तावेज़ के अनुरूप ‘भारत 6G एलायंस’ का गठन किया गया है। यह गठबंधन घरेलू उद्योगों, स्टार्टअप्स और अनुसंधान संस्थानों के साथ मिलकर अगली पीढ़ी की वायरलेस तकनीक पर काम कर रहा है।
अनुसंधान और विकास पर भारी निवेश
दूरसंचार प्रौद्योगिकी विकास कोष (TTDF) के माध्यम से देश में रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) को बड़ी वित्तीय मदद दी जा रही है। फरवरी 2026 तक कुल 136 आर एंड डी परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिनमें से 104 परियोजनाएं अकेले 6G तकनीक से संबंधित हैं। इन परियोजनाओं में क्वांटम संचार, उपग्रह नेटवर्क और दूरसंचार सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं। सरकार का यह निवेश भारत को भविष्य की दूरसंचार तकनीकों के डिजाइन और परिनियोजन में दुनिया के अग्रणी देशों की कतार में खड़ा करने के लिए किया जा रहा है।


