नई दिल्ली | 28 फरवरी, 2026
वसंत की मदमस्त हवाओं और फाल्गुन के रंगों के बीच मार्च 2026 का महीना उन परिवारों के लिए खुशियों की सौगात लेकर आ रहा है, जो अपने प्रियजनों के विवाह की योजना बना रहे हैं। हिंदू पंचांग और ज्योतिषीय गणना के अनुसार, मार्च का पूर्वार्ध (महीने का पहला पखवाड़ा) मांगलिक कार्यों के लिए अत्यंत शुभ और फलदायी रहने वाला है। हालांकि, महीने के उत्तरार्ध में ग्रहों की स्थिति बदलने के कारण विवाह के आयोजनों पर कुछ समय के लिए विराम भी लगेगा।
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विवाह के लिए सितारों की अनुकूल स्थिति
शास्त्रों के अनुसार, विवाह जैसा बड़ा मांगलिक कार्य तभी संपन्न होता है जब देवगुरु बृहस्पति और शुक्र तारा उदित अवस्था में हों। मार्च 2026 की शुरुआत में ये दोनों ही ग्रह अपनी अनुकूल स्थिति में हैं, जिससे वैवाहिक जीवन में सुख, समृद्धि और प्रेम का संचार होता है। ज्योतिषियों का मानना है कि इस महीने की शुरुआत में पड़ने वाले नक्षत्र, जैसे कि उत्तरा फाल्गुनी, हस्त और स्वाति, वैवाहिक गठबंधन के लिए बहुत ही स्थिर और शुभ योग बना रहे हैं। इन नक्षत्रों में शुरू हुआ दांपत्य जीवन लंबा और खुशहाल माना जाता है।

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होली के आस-पास शहनाइयों की गूँज
मार्च के पहले सप्ताह में ही विवाह के कई सुंदर मुहूर्त बन रहे हैं। 1 और 2 मार्च को फाल्गुन मास की द्वादशी और त्रयोदशी तिथि है, जो रविवार और सोमवार के दिन पड़ रही है। यह सप्ताहांत (वीकेंड) होने के कारण कई परिवारों के लिए मेहमानों के जुटाव और आयोजन के लिहाज से बहुत सुविधाजनक है। इसके बाद 4 मार्च को होली का त्योहार मनाया जाएगा, और ठीक उसके अगले दिन 5 और 6 मार्च को भी पंचांग के अनुसार विवाह की रस्में निभाई जा सकती हैं। होली के रंगों के साथ विवाह की खुशियां मिलना किसी उत्सव से कम नहीं होगा।
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मध्य मार्च के विशेष और अंतिम मुहूर्त
महीने के दूसरे सप्ताह में 11 और 12 मार्च को शहनाइयां बजने के प्रबल योग हैं। ये दिन उन लोगों के लिए खास हैं जो मध्य मार्च में विवाह करना चाहते हैं क्योंकि इसके बाद मुहूर्त कम होने लगते हैं। इसके बाद 14 मार्च का दिन इस महीने का सबसे महत्वपूर्ण दिन साबित होगा। इस दिन ‘पापमोचिनी एकादशी’ भी है, जिसे हिंदू धर्म में स्वयं-सिद्ध तिथियों में गिना जाता है। दोपहर तक विवाह के शुभ लग्न रहेंगे, लेकिन शाम होते ही खगोलीय स्थिति में एक बड़ा बदलाव आएगा जो मांगलिक कार्यों पर रोक लगा देगा।
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खरमास का आगाज़ और विवाह पर विराम
मार्च के महीने में एक महत्वपूर्ण मोड़ 14 मार्च 2026 की शाम को आएगा। इस दिन सूर्य देव कुंभ राशि का त्याग कर मीन राशि में प्रवेश करेंगे, जिसे ‘मीन संक्रांति’ कहा जाता है। सूर्य के मीन राशि में प्रवेश करते ही ‘खरमास’ (जिसे मलमास भी कहते हैं) शुरू हो जाएगा। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब सूर्य गुरु की राशि (धनु या मीन) में होते हैं, तो उनका तेज और शुभता कम हो जाती है, इसलिए इस एक महीने की अवधि में विवाह, मुंडन, छेदन या गृह प्रवेश जैसे संस्कार वर्जित माने जाते हैं। यह विराम लगभग 14 अप्रैल तक बना रहेगा।
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मुहूर्तों की सीमित संख्या को देखते हुए बैंकॉक हॉल, कैटरिंग सेवाएं और डेकोरेटर्स की बुकिंग अभी से चरम पर है। खरमास लगने से पहले लोग अपने जरूरी मांगलिक कार्य निपटा लेना चाहते हैं, जिसके कारण फोटोग्राफर्स और पंडितों की मांग भी काफी बढ़ गई है। यदि आप भी इस मार्च में विवाह बंधन में बंधने जा रहे हैं, तो यह सही समय है अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने का, क्योंकि 14 मार्च के बाद सीधे अप्रैल के मध्य में बैसाखी के बाद ही शहनाइयों की गूँज दोबारा शुरू होगी।

