नई दिल्ली: केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0’ योजना के तहत देश के आंगनवाड़ी केंद्रों को आधुनिक और सुविधायुक्त बनाने के अभियान में एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, अब तक देशभर के 1,03,940 आंगनवाड़ी केंद्रों को ‘सक्षम आंगनवाड़ी केंद्रों’ के रूप में अपग्रेड कर दिया गया है। इस कायाकल्प का मुख्य उद्देश्य लाभार्थियों तक पोषण की बेहतर पहुंच सुनिश्चित करना और 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा व देखभाल पर विशेष ध्यान केंद्रित करना है।
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डिजिटल तकनीक और आधुनिक सुविधाओं से लैस हुए केंद्र
अपग्रेड किए गए इन केंद्रों को अब पारंपरिक केंद्रों के मुकाबले कहीं अधिक उन्नत बनाया गया है। इन केंद्रों में बच्चों के सीखने के लिए एलईडी स्क्रीन और अन्य ऑडियो-विजुअल साधन लगाए गए हैं, ताकि वे आधुनिक तरीके से शिक्षा ग्रहण कर सकें। इसके अलावा, जहाँ संभव हो वहाँ वाई-फाई और इंटरनेट कनेक्टिविटी प्रदान की गई है। बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए केंद्रों में वाटर फिल्टर और आरओ सिस्टम के जरिए सुरक्षित पेयजल की सुविधा सुनिश्चित की गई है। केंद्रों की दीवारों पर ‘बीएएलए’ (बिल्डिंग एज़ लर्निंग एड) पेंटिंग बनाई गई है, जो बच्चों के लिए खेल-आधारित शिक्षण में सहायक साबित हो रही है। साथ ही, केंद्रों में वर्षा जल संचयन प्रणाली और पोषण वाटिकाएं (किचन गार्डन) भी तैयार की गई हैं।
‘पोषण भी पढ़ाई भी’: कार्यकर्ताओं को मिल रहा है विशेष प्रशिक्षण
आंगनवाड़ी केंद्रों को स्कूल के लिए आधार तैयार करने वाला केंद्र बनाने की दिशा में ‘पोषण भी पढ़ाई भी’ (PBPB) पहल के तहत कार्यकर्ताओं को व्यापक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। 9 मार्च 2026 तक देश के 10.25 लाख से अधिक आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है। 0-3 वर्ष के बच्चों के लिए ‘नवचेतना’ ढांचे के तहत घरों के व्यवस्थित दौरे किए जा रहे हैं, जबकि 3-6 वर्ष के बच्चों के लिए ‘आधारशिला’ नामक राष्ट्रीय पाठ्यक्रम लागू किया गया है। यह पाठ्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप है, जो खेल और गतिविधियों के जरिए बच्चों की नींव मजबूत करने पर केंद्रित है।
प्राथमिक स्कूलों के साथ समन्वय से मिलेगी सुचारू शिक्षा
सरकार ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए आंगनवाड़ी केंद्रों को सरकारी प्राथमिक स्कूलों के परिसर में ही स्थापित करने या नजदीकी स्कूलों से जोड़ने के दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इस कदम से आंगनवाड़ी में होने वाली शुरुआती शिक्षा और कक्षा 1 से शुरू होने वाली औपचारिक स्कूली शिक्षा के बीच एक मजबूत कड़ी बनेगी। इससे संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और बच्चों को प्री-स्कूल से प्राथमिक स्कूल में प्रवेश दिलाने में आसानी होगी। यह पहल भविष्य के स्वस्थ और शिक्षित भारत की नींव तैयार करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।

